बेतिया बुडको कार्यालय हुआ पदाधिकारी विहीन, 100 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर लगा ब्रेक

बेतिया बुडको कार्यालय में अधिकारियों की भारी कमी से 100 करोड़ रुपये से अधिक की महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं. स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज और सड़क निर्माण जैसी प्रमुख योजनाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

Bettiah News: बेतिया शहर की कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर प्रशासनिक संकट का असर पड़ने लगा है. बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बुडको) के कार्यपालक अभियंता सह प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजकुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद बेतिया का बुडको कार्यालय लगभग पदाधिकारी विहीन हो गया है. पहले से ही सहायक अभियंता का पद आठ महीने से खाली है, जबकि साइट इंचार्ज सह कनीय अभियंता का भी हाल ही में तबादला हो चुका है.

100 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं पर असर

अधिकारियों की कमी का सीधा असर शहर में चल रही और प्रस्तावित 100 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं पर पड़ रहा है. इनमें 56.96 करोड़ रुपये की स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना सबसे प्रमुख है, जिससे करीब दो लाख लोगों को जलजमाव से राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि अधिकारियों की कमी के कारण परियोजना की गति धीमी हो गई है.

सड़क परियोजनाएं भी अटकीं

करीब 9.50 करोड़ रुपये की लागत से काली धाम से मनवापुल तक बनने वाली 2.10 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है. वहीं खीरी के गाछ से कमलनाथ नगर होते हुए सुप्रिया सिनेमा रोड तक बनने वाली लगभग 1.75 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना भी फाइलों में अटकी हुई है, जबकि इसका कार्यादेश पहले ही जारी किया जा चुका है.

इसके अलावा करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली संत जेवियर रोड बरसात में जलजमाव के कारण तालाब जैसी स्थिति में पहुंच गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण शुरू नहीं होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है.

कार्यशैली पर भी उठ रहे सवाल

बुडको की कार्यशैली को लेकर भी कई शिकायतें सामने आई हैं. कई स्थानों पर सर्वे से कम चौड़ाई में नाला निर्माण, गलत अलाइनमेंट तथा बिजली के पोल हटाए बिना कार्य शुरू करने के आरोप लगे हैं. पथ निर्माण विभाग की आपत्ति के बाद कुछ स्थानों पर काम भी रोकना पड़ा.

नगर प्रशासन ने जताई चिंता

नगर आयुक्त शिवाक्षी दीक्षित ने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. सभी योजनाओं की समीक्षा कर आवश्यक जांच कराई जाएगी. उन्होंने स्वीकार किया कि कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता के पद रिक्त रहने से परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ा है.

महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने कहा कि नए अधिकारियों की शीघ्र तैनाती और योजनाओं में आ रही गड़बड़ियों को दूर करने के लिए संबंधित स्तर पर मांग की गई है. अब शहरवासियों की निगाहें सरकार और बुडको मुख्यालय पर टिकी हैं कि रिक्त पद कब भरे जाते हैं और रुकी हुई विकास योजनाओं को कब गति मिलती है.



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लेखक के बारे में

By Madhukar mishra

मधुकर मिश्र ने 1986 में आकाश मार्ग हिंदी दैनिक देवरिया उत्तर प्रदेश से पत्रकारिता की शुरुआत की थी. इसके बाद में दिल्ली और पटना से एक साथ प्रकाशित संध्या प्रहरी, आज, नवभारत टाइम्स में कार्य किए. इस क्रम में पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ रह चुके हैं. वर्तमान में बेतिया प्रभात खबर हिंदी दैनिक सह मल्टीमीडिया कार्यालय से जुड़कर कार्य कर रहे हैं.

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