Bagaha News: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के पिपरासी क्षेत्र से भटक कर एक तेंदुआ उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर गया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों के ग्रामीणों और किसानों में भारी दहशत का माहौल है. बीते शनिवार को तेंदुए द्वारा किए गए एक हिरण के शिकार को दोबारा खाने की तलाश में वह उसी स्थल पर लौट रहा है, जिसका खुलासा सोमवार की सुबह हुआ है.
गन्ने के खेत में मिले तेंदुए के ताज़ा पग मार्क
स्थानीय ग्राम प्रधान (मुखिया) नंदेश्वर चौरसिया ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को जटहा बाजार थाना क्षेत्र के कटाई भरपूरवा गाँव निवासी संदीप कुशवाहा, शंभू कुशवाहा, भभूति बैठा और हृदया यादव समेत कई किसान सुबह-सुबह अपने गन्ना के खेतों में खाद देने गए हुए थे. इसी दौरान किसानों को खेत में और शनिवार को मृत मिले हिरण के शव वाले स्थान पर तेंदुए के ताज़ा पग मार्क (पैरों के निशान) दिखाई दिए.
खेतों में पग मार्क मिलने से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि तेंदुआ अपने शिकार को खोजने और खाने के लिए दोबारा उस स्थान पर आया था. यह दृश्य देखकर किसानों के बीच डर का माहौल पैदा हो गया है.
सुरक्षा के लिए खेतों में उठानी पड़ी लाठी और बलुआ
तेंदुए की मौजूदगी और उसके हिंसक तेवरों को देखते हुए स्थानीय किसानों ने अब अपनी सुरक्षा की कमान खुद संभाल ली है:
- हथियारों के साथ समूह में जा रहे किसान: तेंदुए के खौफ को देखते हुए किसान अब अकेले खेतों में जाने से पूरी तरह बच रहे हैं और अपनी सुरक्षा के लिए लाठी-डंडे तथा बलुआ जैसे धारदार हथियार लेकर समूह (ग्रुप) में जा रहे हैं.
- खेतों में जाना किसानों की मजबूरी: वर्तमान समय में हो रही बारिश के कारण किसानों को अपने गन्ने के खेत में खाद देना बेहद ज़रूरी है. इसके साथ ही धान की बुवाई और रोपणी (रोपाई) के कार्यों के लिए भी उन्हें मजबूरीवश रोज खेतों का रुख करना पड़ रहा है.
- एक महीने से भटक रहा है तेंदुआ: वन्यजीवों की मैपिंग के अनुसार, यह तेंदुआ बीते लगभग एक महीने से पिपरासी क्षेत्र में लगातार भटक रहा है और अब यह भटकते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा में दाखिल हो चुका है.
यूपी-बिहार सीमा पर तेंदुए की इस सक्रियता को देखते हुए किसानों का खेतों में अकेले जाना कतई सुरक्षित नहीं है. स्थानीय वन विभाग और पुलिस प्रशासन को अविलंब इस क्षेत्र में गश्त बढ़ानी चाहिए ताकि किसी भी अप्रिय घटना या हिंसक हमले को समय रहते रोका जा सके.
बेतिया के बगहा से इजरायल अंसारी की रिपोर्ट
