बगहा से चंद्रप्रकाश आर्य की रिपोर्ट
Bagaha News: बगहा अनुमंडल के भितहा प्रखंड में पीपरा-पिपरासी (पीपी) तटबंध पर कराए गए एंटीरोजन कार्य को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. तटबंध के कई हिस्सों में जियो बैग खिसकने और दरारें पड़ने की शिकायत सामने आने के बाद इलाके में दहशत का माहौल है. लोगों को वर्ष 2017 में हुए तटबंध टूटने की भयावह घटना फिर से याद आने लगी है.
जियो बैग खिसकने से बढ़ी चिंता
जानकारी के अनुसार, सेमरवारी के 23.6 किलोमीटर ठोकर से लेकर चन्दरपुर के 26.5 किलोमीटर तक बाढ़ पूर्व तैयारी के तहत एंटीरोजन कार्य कराया गया था. बारिश शुरू होने से पहले विभाग ने काम पूरा होने का दावा किया था, लेकिन अब कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि चन्दरपुर के पास कई जगहों पर जियो बैग खिसक गए हैं और उनमें दरारें साफ दिखाई दे रही हैं.
2017 की घटना से सहमे ग्रामीण
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून आते ही तटबंध को लेकर डर बढ़ जाता है. ग्रामीणों को 15 अगस्त 2017 की वह सुबह याद है, जब चन्दरपुर के पास पीपी तटबंध टूट गया था. उस हादसे में भुइधरवा, मच्छहा और डीडीपकड़ी पंचायत के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे और हजारों लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा था.
अधिकारियों ने जांच का दिया भरोसा
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद काम मानक के अनुसार नहीं हुआ. लोगों ने जल्द मरम्मत कराने की मांग की है. वहीं कार्यपालक अभियंता विजय कुमार पाल ने कहा कि तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है. अगर कहीं दरार या तकनीकी समस्या मिली है तो उसकी जांच कर तत्काल मरम्मत कराई जाएगी.
