बगहा से इजरायल अंसारी की रिपोर्ट
Bagaha News: बगहा के चर्चित पिंटू यादव हत्याकांड में व्यवहार न्यायालय ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्रा की अदालत ने रामनगर थाना कांड संख्या-596/2024 एवं सत्र वाद संख्या-415/2025 की सुनवाई पूरी होने के बाद अनीता देवी और उनके दो पुत्रों गोलू कुमार यादव एवं कृति यादव को हत्या और हत्या के प्रयास का दोषी करार दिया.
हत्या के मामले में उम्रकैद, हत्या के प्रयास में 10 वर्ष की सजा
अदालत ने 50 वर्षीय अनीता देवी, 22 वर्षीय गोलू कुमार यादव और 23 वर्षीय कृति यादव को पिंटू यादव की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई. साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया. हत्या के प्रयास के मामले में तीनों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास तथा 50-50 हजार रुपये अतिरिक्त जुर्माने की भी सजा सुनाई गई. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
प्रत्येक दोषी पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना
न्यायालय ने प्रत्येक दोषी पर कुल डेढ़ लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. साथ ही जुर्माने की राशि मृतक पिंटू यादव के आश्रितों को क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जाएगी.
साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
निर्णय में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, चिकित्सकीय साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों एवं अन्य दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर आरोपों को संदेह से परे सिद्ध किया. न्यायालय ने अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के उस सिद्धांत का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि न्यायिक प्रक्रिया का मूल उद्देश्य सत्य की खोज करना है और सत्य ही न्याय की आधारशिला है.
आपराधिक इतिहास को भी माना गया महत्वपूर्ण
विशेष लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने अदालत को बताया कि दोषियों का पूर्व से भी आपराधिक इतिहास रहा है. उनके अनुसार गोलू कुमार यादव के खिलाफ 10, कृति यादव के खिलाफ 5 तथा अनीता देवी के खिलाफ 3 आपराधिक मामले दर्ज हैं. अदालत ने अपराध की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए कठोर दंड को आवश्यक माना.
चर्चित मामले में आया महत्वपूर्ण फैसला
इस फैसले को बगहा क्षेत्र के चर्चित आपराधिक मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है. अदालत के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने न्याय मिलने पर संतोष जताया, जबकि पुलिस ने इसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण बताया.
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