बीहट. कविवर रामावतार यादव शक्र की 111वीं जयंती समारोह के अवसर पर रविवार को शक्र के पैतृक गांव रुपनगर में कविवर शक्र साहित्य उत्थान समिति के बैनर तले आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विश्वभर सिंह ने किया तथा संचालन प्रवीण प्रियदर्शी ने किया. कवि सम्मेलन में वरिष्ठ साहित्यकार अशांत भोला ने आसमान भी अब साफ नहीं, दिखता कोई अंधेरे के खिलाफ नहीं सुनाया. जलेस के राज्य सचिव विनिताभ ने युद्ध क्या है कुंठित भावनाए की सुनाया. युवा कवि संजीव फिरोज ने अपने वतन की मिट्टी में दो गज जमीन नसीब नहीं हुआ कविता का पाठ किया. युवा कवि रामकृष्ण ने कहा कि हर पांच साल में एक ही गलती बार-बार दोहराता हूं कविता का पाठ किया. वहीं अजीत कुमार संजीत ने समाज में यहां बढ़ रहा तनाव है, नेता समाज में ला रहा अलगाव सुनाया. मैथिली कवि श्याम नंदन निशाकर ने अब मौत नहीं जिंदगी मैयत हो गयी कविता का पाठ किया. कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे साहित्यकार प्रवीण प्रियदर्शी ने कहा कि शक्र की पुण्यतिथि जून 2026 तक सिमरिया दो पंचायत समेत आसपास के गांवों की दीवारों पर शक्र की कविता लिखवाया जायेगा. अध्यक्षता कर रहे दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विश्वम्भर सिंह ने कहा कि आयोजन समिति शक्र की साहित्य के उत्थान के लिए बेहतर कार्य कर रही है. कवि सम्मेलन से पूर्व साहित्यकारों ने कविवर रामावतार यादव शक्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दिया. इस मौके पर शक्र साहित्य उत्थान समिति के अध्यक्ष रामानुज सिंह, सचिव राहत रंजन, पंसस वकील रजक, शक्र के पौत्र कृष्ण नंदन यादव, रामानंद यादव, रामकृष्ण, धीरज वत्स, गंगाधर पासवान, श्रीदेव पासवान, अशोक पासवान, सुरेंद्र दास, शंकर सिंह, कृष्ण मुरारी, मनीष कुमार, राहुल कुमार, अमरदीप सुमन, सचिन कुमार, प्रदीप, रोहित, अविनाश दास, मुलानंद, विक्रम यादव, कृष्ण कुमार शर्मा, सदानंद यादव, कर्मशील यादव, सुजीत रजक, गौरव भारद्वाज, शिवदानी सिंह, युगल साह, रामाधार सिंह, ललित राय, रामलगन राय समेत अन्य ग्रामीण मौजूद थे.
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