बखरी में फुले-आंबेडकर विचार मंच ने भीम मार्च निकालकर किया विरोध प्रदर्शन
सभा में विधायक सूर्यकांत पासवान ने कहा अनुमंडल प्रशासन ने आंबेडकरवादियों का अपमान किया है. एसडीपीओ द्वारा आंबेडकरवादियों को शराबी कहना उनके सामंती सोच को उजागर करता है.
बखरी. सोमवार को बखरी में फुले-अंबेडकर विचार मंच द्वारा भीम मार्च सह धरना सभा आयोजित किया गया. बीते आंबेडकर जयंती के दिन अनुमंडल प्रशासन एवं सामंती ताकतों द्वारा आंबेडकर वादियों के साथ किये गये दुर्व्यवहार एवं बाबा साहेब के प्रतीकों के अपमान के आरोप में निकाले मार्च की शुरुआत विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आये लोगों द्वारा अंबेडकर चौक स्थित बाबा साहेब के स्मारक पर माल्यार्पण के साथ हुई. बड़ी संख्या में लोगों ने गाजे-बाजे के साथ मंच के अध्यक्ष कैलाश सदा, रविराज पासवान, राजा पासवान, लोजपा आर के प्रखंड अध्यक्ष पंकज पासवान के संयुक्त नेतृत्व में मक्खाचक, रामपुर, पठनटोली, सलौना होते हुए अनुमंडल कार्यालय स्थित धरनास्थल मार्च पहुंचा. मार्च के दौरान जय भीम, बाबा साहेब का अपमान नहीं सहेगा नौजवान,बाबा तेरे अरमानों को मंजिल तक पहुंचायेंगे जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा. अनुमंडल कार्यालय आने के पश्चात आंबेडकर वादियों द्वारा धरना तथा प्रतिरोध सभा की गयी. सभा की अध्यक्षता प्रदीप कुमार ने की. संचालन पूर्व मुखिया शिवनारायण राम ने किया. सभा में विधायक सूर्यकांत पासवान ने कहा अनुमंडल प्रशासन ने आंबेडकरवादियों का अपमान किया है. एसडीपीओ द्वारा आंबेडकरवादियों को शराबी कहना उनके सामंती सोच को उजागर करता है. यह अपमान बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. दलित नेता विजय पासवान ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि बाबा साहेब के स्मारक से प्रतीक चिन्ह झंडा उतारना आंबेडकरवादियाें का सीधा अपमान है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अविलंब झंडा पुनः स्थापित नहीं किया गया, तो आंबेडकरवादियों स्वयं झंडा फहरायेंगे. पूर्व विधान पार्षद उषा सहनी ने कहा कि जिस प्रकार बाबा साहेब ने अपने समय में मनुवाद से संघर्ष किया है. उसी प्रकार आज उनके अनुयायी भी संघर्ष को तैयार हैं. मंच के अध्यक्ष कैलाश सदा ने घोषणा की कि गांव-गांव में अभियान चलाकर मनुवादी सोच के खिलाफ आवाज बुलंद की जायेगी और बखरी में सामंती ताकतों को सिर उठाने नहीं दिया जायेगा. धरना के अंत में एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम से भेंट कर मांग पत्र सौंपा. इस अवसर पर ओम प्रकाश बौध, दिलीप केसरी, भिखारी दास, शिव सहनी, अनिल अंजान, राजेंद्र सहनी, धीरेंद्र कुमार, विकास कुमार, रामचरण अंबेडकर, भूषण चौधरी, जयप्रकाश मंडल, भवेश पासवान, मो नसीम, लक्ष्मी पासवान, संजय पासवान, पप्पू सहनी, विजय सहनी आदि ने विचार रखे.
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