बेगूसराय में ताइक्वांडो के दांव-पेंच सीख रहे 100 से ज्यादा बच्चे, किसी की नजर ओलंपिक गोल्ड पर तो कोई सेल्फ डिफेंस की तैयारी में

बेगूसराय के इंडियन ऑयल कल्याण केंद्र में 100 से अधिक बच्चे ताइक्वांडो का प्रशिक्षण ले रहे हैं। ओलंपिक और सेल्फ डिफेंस के लिए बच्चों में जबरदस्त उत्साह है।

आमतौर पर बचपन में बच्चों के हाथों में खिलौने और खेलने का सामान नजर आता है, लेकिन बेगूसराय के इंडियन ऑयल कल्याण केंद्र में नजारा कुछ अलग है. यहां 100 से अधिक बच्चे खेल के साथ अपनी सुरक्षा और भविष्य की तैयारी में जुटे हैं. कोई ताइक्वांडो की किक और पंच पर मेहनत कर ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने का सपना देख रहा है, तो कोई मुश्किल परिस्थिति में खुद की रक्षा करने के लिए मार्शल आर्ट सीख रहा है.

कल्याण केंद्र में छोटे बच्चों से लेकर किशोर उम्र के खिलाड़ी तक नियमित रूप से ताइक्वांडो का अभ्यास करते हैं. प्रशिक्षण के दौरान बच्चे अलग-अलग तकनीकों को सीखने के साथ अपनी फिटनेस, शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती पर भी काम कर रहे हैं. बच्चों में खेल को लेकर ऐसा उत्साह है कि कई खिलाड़ी नियमित अभ्यास के लिए दिन में दो बार तक प्रशिक्षण लेने पहुंचते हैं.

किसी की नजर ओलंपिक गोल्ड पर, कोई सीख रहा सेल्फ डिफेंस

ताइक्वांडो खिलाड़ी अन्या आर्यन का सपना बाकी बच्चों से कहीं बड़ा है. वह भविष्य में ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहती हैं. इसके लिए वह अभी से नियमित अभ्यास कर रही हैं. उनका मानना है कि बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए कम उम्र से ही मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास जरूरी है.

वहीं करीब पांच साल की उम्र का एक नन्हा खिलाड़ी भी पूरे उत्साह के साथ ताइक्वांडो की ट्रेनिंग ले रहा है. इतनी कम उम्र में उसके अंदर मार्शल आर्ट सीखने का जुनून देखकर वहां मौजूद लोग भी उत्साहित नजर आते हैं. वह ताइक्वांडो को मुख्य रूप से सेल्फ डिफेंस के लिए सीख रहा है.

बच्चों का कहना है कि ताइक्वांडो केवल लड़ने की कला नहीं है. इसके अभ्यास से शरीर फिट रहता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है. नियमित ट्रेनिंग से एकाग्रता और अनुशासन की आदत विकसित होती है. साथ ही विपरीत परिस्थितियों में खुद को संभालने का हौसला भी मिलता है.

दिन में दो बार अभ्यास, खेल को बेहतर बनाने की कोशिश

ताइक्वांडो खिलाड़ी बिहान विवेक ने बताया कि वह दिन में दो बार प्रशिक्षण के लिए आते हैं. लगातार अभ्यास के जरिए वह अपनी तकनीक और फिटनेस को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं. खिलाड़ियों का कहना है कि शुरुआत में कुछ तकनीक कठिन लगती हैं, लेकिन नियमित अभ्यास के बाद उनमें आसानी होने लगती है.

प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को अलग-अलग तकनीकों के साथ शारीरिक व्यायाम भी कराया जाता है. इससे उनकी फिटनेस बेहतर होती है और खेल के लिए जरूरी ताकत और संतुलन विकसित होता है. खिलाड़ियों के लिए अभ्यास का यह दौर सिर्फ प्रतियोगिता की तैयारी नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने की प्रक्रिया भी है.

अभिभावक भी बच्चों के प्रदर्शन से उत्साहित

बच्चों के ताइक्वांडो प्रशिक्षण को लेकर अभिभावक भी काफी उत्साहित हैं. एक खिलाड़ी की मां सत्यभामा ने बताया कि उनका बच्चा नियमित रूप से कल्याण केंद्र में ताइक्वांडो सीखने जाता है. उनकी इच्छा है कि बच्चा खेल में बेहतर प्रदर्शन करे और आगे चलकर बड़े मंच पर अपने परिवार और देश का नाम रोशन करे.

उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि उनका बच्चा एक दिन ओलंपिक तक पहुंचे और भारत के लिए मेडल जीते. उनका मानना है कि बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल के लिए भी समय देना चाहिए, क्योंकि खेल से उनमें आत्मविश्वास और अनुशासन विकसित होता है.

वहीं सुलक्षणा मीणा ने बताया कि उनके बच्चे भी यहां ताइक्वांडो का प्रशिक्षण ले रहे हैं. उनका कहना है कि आज के समय में बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ सेल्फ डिफेंस सीखना भी जरूरी है. कम उम्र से ही बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जाए, तो वे भविष्य में आने वाली चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं.

खेल में करियर की भी दिख रही राह

अभिभावकों का मानना है कि ताइक्वांडो बच्चों को फिट रखने के साथ खेल के क्षेत्र में करियर का अवसर भी दे सकता है. उनकी इच्छा है कि बच्चे प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें, बेहतर प्रदर्शन करें और मेडल जीतकर आगे बढ़ें.

कई अभिभावक खेल में उपलब्ध अवसरों को बच्चों के भविष्य से भी जोड़कर देखते हैं. उनका मानना है कि अगर बच्चे राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उनके सामने आगे बढ़ने के कई रास्ते खुल सकते हैं. इसी वजह से वे बच्चों को नियमित अभ्यास के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.

पसीने के साथ तैयार हो रहे बड़े सपने

इंडियन ऑयल के कल्याण केंद्र में रोजाना पसीना बहा रहे ये बच्चे सिर्फ ताइक्वांडो की तकनीक नहीं सीख रहे हैं. प्रशिक्षण के साथ उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास, एकाग्रता और लक्ष्य के प्रति समर्पण की भावना भी विकसित हो रही है.

इन नन्हे खिलाड़ियों के सपनों में कोई खुद को ओलंपिक के मंच पर देख रहा है, तो कोई अपनी सुरक्षा के लिए मजबूत बनना चाहता है. लगातार अभ्यास और मेहनत के बीच इन बच्चों की आंखों में बड़े सपने हैं. यही मेहनत आने वाले समय में किसी खिलाड़ी को जिला और राज्य स्तर से आगे राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा सकती है. बेगूसराय के इन नन्हे खिलाड़ियों की लगन ने यह उम्मीद जरूर जगाई है कि आने वाले दिनों में इनमें से कोई अपने शहर के साथ देश का नाम भी रोशन कर सकता है.

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By Vikash Kumar

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