बेगूसराय : बीहट में बाल कलाकारों ने मंच पर दिखाया ‘डिजिटल अंधेरा’, साइबर ठगी और फेक न्यूज पर किया प्रहार

बेगूसराय में बाल कलाकारों ने 'डिजिटल अंधेरा' नामक नाटक का मंचन कर साइबर ठगी, फेक न्यूज और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक किया. बच्चों की सहज और प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

Begusarai News : कहते हैं, यथार्थवादी रंगमंच में अभिनय की पराकाष्ठा वह है, जब मंच पर अभिनय, अभिनय जैसा दिखाई ही न दे-सब कुछ जीवन की तरह सहज और स्वाभाविक प्रतीत हो. विशाल कुमार द्वारा निर्देशित नाटक डिजिटल अंधेरा में अलग-अलग आयु वर्ग के एक दर्जन बाल कलाकार मंच पर उपस्थित थे, लेकिन उनकी उपस्थिति कहीं से भी अभिनय के प्रदर्शन जैसी नहीं लगती वे बेहद सहजता से अपने-अपने चरित्रों का जीवन जीते हुए दिखाई दिये.

बाल रंगमंच आर्ट एंड कल्चरल सोसाइटी, मल्हीपुर बीहट के द्वारा मां देवकी देवी की पावन स्मृति में सामाजिक एवं समकालीन नाटक “डिजिटल अंधेरा” का सफल मंचन किया गया.

मनमोहक समूह नृत्य से हुई शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ साक्षी डांस क्लासेज की बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक समूह नृत्य से हुआ. गीतों की धून पर आरुषि भारती, मित्तल राज, सुहानी कुमारी, संस्कृति एवं वैष्णवी कुमारी की नृत्य प्रतिभा देखकर उपस्थित दर्शकों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की.

साइबर ठगी व अफवाहों पर प्रहार

उसके बाद प्रस्तुत नाटक “डिजिटल अंधेरा” में बाल कलाकारों ने डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध, फेक न्यूज़, ऑनलाइन ठगी, अफवाह और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से दर्शकों के समक्ष रखा. नाटक की कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार से शुरू होती है, जहां दिखावे और लालच के कारण एक महिला फर्जी लोन के जाल में फंसकर साइबर ठगी का शिकार हो जाती है.

वहीं एक अन्य दृश्य में एक छात्र फर्जी स्कॉलरशिप के झांसे में आकर अपनी व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा कर देता है, जिसका फायदा उठाकर साइबर अपराधी उसे ठगने का प्रयास करता है. नाटक में सोशल मीडिया पर फैलने वाली फेक न्यूज़ और बिना सत्यापन के किसी भी सूचना पर विश्वास करने की प्रवृत्ति पर भी तीखा व्यंग्य किया गया.

हास्य और मनोरंजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि अंधा समर्थन और अंधा विरोध, दोनों ही समाज में भ्रम और अफवाह को बढ़ावा देते हैं.

बाल कलाकारों की सशक्त प्रस्तुति

नाटक में मुस्कान कुमारी (मां), आयुष कुमार (पिता), गणेश कुमार (बेटा), प्रशांत कुमार (पड़ोसी लड़का), सौरभ कुमार (विद्यार्थी), मो. सूरज (पिता), अन्नू कुमारी (सूत्रधार), अंकित कुमार (नेता धर्मदास), आयुष कुमार (स्कैमर), शिवम कुमार, आनंद कुमार, रिया कुमारी, शिंपू कुमारी, चिराग कुमार एवं छोटू कुमार ने कोरस कलाकार के रूप में अपनी सशक्त प्रस्तुति से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा.

सहायक निर्देशक रोहित कुमार और नृत्य निर्देशन साक्षी कुमारी एवं उनकी टीम ने किया. मंच संयोजन आकाश कुमार तथा प्रकाश परिकल्पना सुजीत कुमार एवं ऋषि कुमार की थी. इस नाट्य प्रस्तुति की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि लेखन व निर्देशन से लेकर नाट्य प्रस्तुति तक सबकुछ बाल कलाकारों ने स्वयं संभाल कर प्रस्तुति को जीवंत बना दिया.

सजगता व सावधानी का संदेश

इस अवसर पर बाल रंगमंच के निदेशक ऋषिकेश कुमार ने कहा कि आज के दौर में डिजिटल तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ अनेक चुनौतियां भी सामने आई हैं. डिजिटल अंधेरा के माध्यम से लोगों को सतर्क रहने, किसी भी सूचना की सत्यता जांचने तथा ऑनलाइन लेन-देन में सावधानी बरतने का संदेश दिया गया है. कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को सम्मानित किया गया.

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By बिपिन कुमार राज

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