बेगूसराय: सिमरिया घाट पर सुरक्षा भगवान भरोसे, जून में 9 लोगों की गई जान, आखिर कब चेतेगा सिस्टम?

Begusarai News: बेगूसराय के सिमरिया घाट पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी श्रद्धालुओं की जान पर भारी पड़ रही है. जून महीने में डूबने से नौ लोगों की मौत और कई लोगों के लापता होने के बाद भी घाट पर बैरिकेडिंग, जल पुलिस और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव बना हुआ है.

बीहट बेगूसराय से बिपिन राज की खास रिपोर्ट
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गंगा सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि करोड़ों जनमानस की मां है, जो जन्म देती है, शुद्ध करती है और मोक्ष का द्वार खोलती है. सिमरिया घाट पर जब श्रद्धालु गीली आंखों और भीगे मन से मां गंगा की शरण में पहुंचते हैं, तो उनके भीतर आस्था, शांति और आत्मबल का भाव उमड़ता है. लेकिन यह पवित्र भाव तब कराह और चीत्कारों में बदल जाता है, जब मां की गोद में उन्हें सिर्फ असुरक्षा, गंदगी और लचर प्रशासनिक व्यवस्था मिलती है. यह सिर्फ घाट की बदहाली नहीं, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की श्रद्धा के साथ किए जा रहे सरासर अन्याय की एक दर्दनाक पीड़ा है.

बैरिकेडिंग और प्राथमिक उपचार के बिना टूट रही सांसें

हर सुबह सूरज की पहली किरणों के साथ जब सिमरिया घाट पर श्रद्धालु ‘गंगे च यमुने चैव…’ का पवित्र मंत्रोच्चारण करते हुए जल में उतरते हैं, तो पूरी आत्मा पवित्र हो जाती है. लेकिन वर्तमान में इन स्नान घाटों पर न तो कोई सुरक्षात्मक बैरिकेडिंग की व्यवस्था है और न ही स्थायी रूप से स्थानीय गोताखोरों की तैनाती की गई है.

कहने को तो यहां एसडीआरएफ (SDRF) की कागजी मौजूदगी है, लेकिन गहराई में बह जाने वाले लोगों को समय पर बचाने वाला कोई नहीं होता. सबसे हैरत की बात तो यह है कि इतने बड़े राष्ट्रीय स्तर के घाट पर एक छोटा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है, जहां पानी से निकाले गए लोगों को तत्काल फर्स्ट-एड मिल सके. दुर्घटना होने पर 8 किलोमीटर दूर बरौनी अस्पताल ले जाते-जाते मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं.

स्मार्ट सिमरिया के हवाई दावे और जमीनी हकीकत

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक सुशील झा कहते हैं कि कई बार प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग की भी गई, लेकिन कुछ मनबढ़ू युवक और असामाजिक तत्व रील बनाने या स्टंट करने के चक्कर में बांस-बल्लों पर चढ़कर गहरे पानी में कूद जाते हैं, जिससे वे टूट जाते हैं. ऐसे लड़कों को रोकने पर वे विवाद करने को उतारू हो जाते हैं. सच तो यह है कि सिमरिया को भले ही कागजों पर ‘स्मार्ट’ बनाया जा रहा हो, लेकिन घाटों की अंदरूनी स्थिति आज भी अत्यंत चिंताजनक है.

जल संसाधन विभाग के अधिकारी रिवर फ्रंट निर्माण के वक्त जो बड़े-बड़े नक्शे दिखाकर दावे करते थे, वे सभी पूरी तरह हवा-हवाई साबित हुए हैं. वर्तमान में नवनिर्मित स्थायी घाट पानी के लिए तरस रहे हैं, क्योंकि मुख्य गंगा नदी इन घाटों से करीब आधा किलोमीटर दूर खिसक कर बह रही है, जहां बिना किसी सुरक्षा घेरे के लोग लगातार डूब रहे हैं.

तेजी से बढ़ता जा रहे हैं आंकड़े

सिमरिया में डूबकर होने वाली मौतों के आंकड़े जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. सवाल यह उठता है कि क्या सिस्टम की सोती हुई आंख को जगाने के लिए मासूमों की बलि चढ़ना ही जरूरी है. ऐसा प्रतीत होता है कि धरातल पर कड़े सुरक्षा इंतजाम करने से अधिक सरकार को आपदा विभाग के जरिए मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा देना ज्यादा आसान लगता है.

हाल के दिनों में सोशल मीडिया के लिए खतरनाक जगहों पर रील्स बनाने का बढ़ता क्रेज भी इन दर्दनाक हादसों का एक मुख्य कारण बनकर उभरा है. स्थानीय निवासियों ने पुरजोर मांग की है कि बनारस के घाटों की तर्ज पर सिमरिया में भी 24 घंटे एक्टिव रहने वाली एक समर्पित ‘जल पुलिस’ और कुशल स्थानीय गोताखोरों की स्थायी तैनाती की जाए.

जून महीने में काल के गाल में समाए मासूमों की सूची

सिमरिया घाट पर केवल जून माह में ही डूबने की जो घटनाएं सामने आई हैं, उनके आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:

03 जून: समस्तीपुर जिले के सिंघिया थानांतर्गत डोडीघा गांव निवासी निर्धन साव के 18 वर्षीय पुत्र बजरंगी साव की डूबने से मौत हो गई. स्थानीय प्रशासन द्वारा करीब 18 घंटे तक चलाए गए कड़े सर्च अभियान के बाद उनका शव बरामद किया जा सका.

06 जून: दरभंगा जिला के हनुमान नगर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत डीलाही गांव से गंगा स्नान के लिए आई 15 वर्षीय ननद मुस्कान कुमारी और उनकी 24 वर्षीय भाभी मन्नु देवी एक साथ गहरे पानी में डूब गईं. इस हादसे में ननद मुस्कान का शव तो मिल गया, लेकिन भाभी मन्नु देवी की लाश को गंगा की तेज धार बहा ले गई, जो आज तक नहीं मिल सकी.

एक ही परिवार के तीन चिराग बुझने से कोहराम

17 जून: बीहट नगर परिषद के वार्ड संख्या-28 निवासी उमाशंकर साह के दो सगे पुत्र विशाल कुमार (26 वर्ष) तथा अमन कुमार (18 वर्ष) अपने ममेरे भाई मुंगेर संदलपुर निवासी रिशांक कुमार गुप्ता (13 वर्ष) के साथ स्नान के दौरान डूब गए. पटना से विशेष रूप से बुलाई गई एनडीआरएफ (NDRF) की टीम ने चौथे दिन की कड़ी मशक्कत के बाद अमन और रिशांक के शव तो बरामद कर लिए, लेकिन बड़े भाई विशाल का शव आज तक लापता है. इस घटना से पूरे बीहट क्षेत्र में आज भी मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है.

हालिया हादसों में अभी भी खोजबीन जारी

26 जून: सुपौल जिले से अपने परिजनों के साथ सिमरिया घाट आए एक अज्ञात युवक की गहरे पानी में चले जाने से डूबकर मौत हो गई. एसडीआरएफ की टीम द्वारा नदी में लगातार उसकी खोजबीन की जा रही है.

28 जून: मधुबनी जिले के गदियानी चौक निवासी 15 वर्षीय छात्र आदित्य कुमार की भी सुरक्षा घेरा न होने के कारण डूबने से मौत हो गई, जिसके शव की तलाश जारी है. पीड़ित परिजनों का आरोप है कि घटना के वक्त एक भी बचाव दल का सदस्य वहां मौजूद नहीं था. इसके अलावा इसी दिन सिमरिया घाट बिंद टोली निवासी लालू निषाद के 6 वर्षीय मासूम पुत्र ओम कुमार की भी पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई.

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Published by: Vikas Jha

विकाश झा प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में छह वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है.

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2020 में भोपाल से हुई, जिसके बाद उन्होंने ETV Bharat, Bharat Express और News24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदार भूमिकाओं का निर्वहन किया. News24 से आगे बढ़ते हुए उन्होंने Adglobal360 India Pvt. Ltd. के माध्यम से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया तथा बिहार सरकार के विभिन्न विभागों की सोशल मीडिया टीमों में भी अपनी सेवाएं दीं.

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मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले विकाश डिजिटल मीडिया की तेज रफ्तार दुनिया में तथ्यों पर आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने के लिए जाने जाते हैं.

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