Begusarai News: (विकाश मिश्रा की रिपोर्ट) मद्यनिषेध सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित सेटिंग कराने की साजिश का खुलासा होने के बाद पुलिस अब पूरे गिरोह की परतें खोलने में जुट गई है. बखरी थाना क्षेत्र के जीतपुर गांव से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और इसका असली मास्टरमाइंड कौन है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार,बखरी थाना क्षेत्र के जीतपुर निवासी मुख्य आरोपी राजेश रौशन की निशानदेही पर भागलपुर जिले के निवासी कपिलदेव मंडल के पुत्र नंदन कुमार को उसके घर से गिरफ्तार किया गया है. बताया जाता है कि नंदन कुमार भी इस पूरे नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था. उससे पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. इधर बखरी पुलिस ने मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में बेगूसराय भेज दिया है.
गुप्त सूचना पर हुई थी बड़ी कार्रवाई
बताते चले कि तकनीकी शाखा,बेगूसराय को बीते 12 जून को सूचना मिली थी कि 14 जून को होने वाली मद्यनिषेध सिपाही भर्ती परीक्षा में धांधली कराने के लिए जीतपुर गांव में बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा किए गए हैं. सूचना के बाद अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी,बखरी के नेतृत्व में तकनीकी शाखा और बखरी थाना की संयुक्त टीम ने राजेश रौशन के घर पर छापेमारी की गई थी. छापेमारी के दौरान पुलिस ने परीक्षा में नकल और सेटिंग कराने में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक उपकरण बरामद किए गए हैं. जब्त सामानों में 38 वॉकी-टॉकी,7 ब्लूटूथ डिवाइस,6 चार्जर,3 जोड़ी विशेष गंजी डिवाइस,2 सिमयुक्त एटीएम कार्डनुमा डिवाइस,3 इलेक्ट्रॉनिक चप्पल,2 माइक्रोफोन,1 मेटल डिटेक्टर,2 मोबाइल फोन तथा कई अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र शामिल हैं. मौके से पुलिस ने जीतपुर निवासी राजेश रौशन और साहेबपुरकमाल थाना क्षेत्र के बाबूराही निवासी दुलारचंद यादव को गिरफ्तार किया था. पूछताछ में दोनों ने परीक्षा में सेटिंग कराने की योजना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की थी. साथ ही अपने अन्य साथियों के शामिल रहने की बात कही है.
ऑनलाइन कोचिंग की आड़ में चल रहा था खेल
स्थानीय लोगों के अनुसार,राजेश रौशन बेहद साधारण परिवार से आता है.उसके पिता सुरेश ग्रामीण चिकित्सक थे. पिता के निधन के बाद राजेश गांव में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगा और बाद में बेगूसराय जाकर ऑनलाइन कोचिंग क्लास संचालित करने लगा. बताया जाता है कि वह स्वयं भी कभी सरकारी नौकरी की तैयारी करता था,लेकिन सफलता नहीं मिलने के बाद उसने कोचिंग की आड़ में अवैध गतिविधियों का रास्ता अपना लिया. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इसी दौरान उसकी पहचान साहेबपुर कमाल और अन्य क्षेत्रों के कुछ युवकों से हुई,जिसके बाद एक संगठित नेटवर्क तैयार किया गया.
पहले से सक्रिय था गिरोह
सूत्रों की मानें तो गिरफ्तार दुलारचंद यादव पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की व्यवस्था कराने का काम करता था. चर्चा है कि वह पुलिस भर्ती परीक्षाओं में सेटिंग कराने वाले नेटवर्क से पहले से जुड़ा हुआ था. उसके पिता होमगार्ड के जवान हैं और वह तीन भाइयों में सबसे बड़ा है.
मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक की जांच में यह मामला केवल दो-तीन लोगों तक सीमित नहीं दिख रहा है. बरामद उपकरणों की संख्या और तकनीकी स्तर को देखते हुए किसी बड़े नेटवर्क की आशंका है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में कितने सदस्य शामिल हैं, उपकरण कहां से लाए गए और परीक्षा में धांधली की पूरी योजना किसने तैयार की थी. फिलहाल मामले में लगातार छापेमारी की जा रही है और पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा. परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगा.
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