(बेगूसराय से विकाश मिश्रा की रिपोर्ट)
Begusarai News : बेगूसराय जिले के राजकीयकृत मध्य विद्यालय, घाघड़ा में भीषण गर्मी से जूझ रहे पक्षियों को राहत पहुंचाने के लिए एक सराहनीय पहल की गई. विद्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं के बीच मिट्टी के सकोरों का वितरण किया गया और उन्हें पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करने के लिए प्रेरित किया गया.
पक्षियों की मदद के लिए बच्चों को सौंपी गई जिम्मेदारी
कार्यक्रम में बच्चों को बताया गया कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान वे अपने घरों की छत, आंगन, बगीचे और अन्य सुरक्षित स्थानों पर पानी से भरे सकोरे रखें, ताकि प्यासे पक्षियों को राहत मिल सके. इस पहल का उद्देश्य बच्चों में पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है.
पर्यावरण संरक्षण का दिया गया संदेश
कार्यक्रम का संचालन शिक्षक वसंत कुमार और सज्जन सदा के नेतृत्व में किया गया. इस दौरान विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और जीव-जंतुओं की सुरक्षा के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई.
पानी के अभाव में पक्षियों की चली जाती है जान
पर्यावरण कार्यकर्ता एवं शिक्षक वसंत कुमार ने कहा कि गर्मी के दिनों में इंसान अपनी प्यास बुझाने के कई साधन जुटा लेता है, लेकिन पक्षियों और अन्य जीवों को पानी के लिए भटकना पड़ता है. कई बार पानी नहीं मिलने से उनकी जान तक चली जाती है. उन्होंने बच्चों से अपने आसपास दाना-पानी रखने और पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय तैयार करने की अपील की.
बर्ड हाउस बनाने के लिए भी किया गया प्रेरित
वसंत कुमार ने विद्यार्थियों से कहा कि वे छुट्टियों के दौरान लकड़ी, प्लाई, गत्ते और अन्य उपलब्ध सामग्रियों से बर्ड हाउस बनाएं, ताकि पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिल सके और वे भीषण गर्मी से बच सकें.
पक्षी अपनी पीड़ा नहीं बता सकते
शिक्षक सज्जन सदा ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सभी जीव-जंतुओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. पक्षी अपनी तकलीफ व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए समाज का दायित्व है कि उनके लिए पानी और भोजन की व्यवस्था करे. उन्होंने बच्चों को प्रतिदिन पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने का संकल्प भी दिलाया.
बेकार वस्तुओं से भी बन सकते हैं पेयजल पात्र
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक कौशल किशोर क्रांति ने बताया कि मिट्टी के सकोरों के अलावा बेकार प्लास्टिक की बोतलों, पुराने डिब्बों और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं का उपयोग कर भी पक्षियों के लिए पेयजल पात्र तैयार किए जा सकते हैं. इन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखकर पक्षियों को राहत पहुंचाई जा सकती है.
विद्यार्थियों ने लिया संरक्षण का संकल्प.
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने पक्षियों की सुरक्षा और संरक्षण का संकल्प लिया. साथ ही गर्मी के मौसम में अधिक से अधिक स्थानों पर दाना-पानी की व्यवस्था करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का वादा किया.
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