बेगूसराय : बाघी मिडिल स्कूल के अधिकांश कमरे जर्जर, तीन में पढ़ते हैं 400 बच्चे

बेगूसराय के बाघी मिडिल स्कूल में बदहाली का आलम है. जर्जर भवनों और खतरनाक छतों के कारण 400 बच्चे जमीन पर पढ़ने को मजबूर हैं. सुविधाओं के अभाव में गरीब और मजदूर परिवारों के बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है.

Begusarai Education News : बेगूसराय जिला मुख्यालय से महज डेढ किलोमीटर दूरी पर नगर निगम क्षेत्र बाघी में स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय अपनी बदहाली का रोना रो रहा है. विद्यालय के कई भवन जर्जर हो गये हैं. भवन के जर्जर होने से बच्चों का पठन पाठन खतरे में हैं. अभिभावक भी चिंतित रहते है. वहीं छात्र के अनुपात में वर्ग संचालन के लिए कमरे की काफी कमी है. हाॅल के छत जर्जर रहने के कारण बच्चों को बरामदे पर ही जमीन पर बिठाकर पठन-पाठन का कार्य किया जा रहा है.

विद्यालय के जीर्णोद्धार व भवन निर्माण को लेकर तत्कालीन विधायक द्वारा वर्ष 2018 में अनुशंसा भी जा चुकी थी. साथ ही विभागीय सूत्रों की माने तो प्रबंध निदेशक बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना से लेकर डीईओ, बीईओ व डीपीओ एसएसए तक जर्जर कमरे व भवन की ओर ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका है. परंतु सात वर्षों से जर्जर छत के नीचे खतरे की स्थिति में बच्चे पढने को मजबूर हैं. जबकि उक्त विद्यालय में ज्यादातर गरीब और मजदूर परिवार के बच्चे ही पढाई कर रहे हैं.

चार कमरे में लगभग 400 बच्चों की चल रही है पढाई

गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को लेकर भी विद्यालय मानक स्थिति को पूरा नही कर पा रहा है. विद्यालय में लगभग 400 बच्चे हैं. इस अनुपात में कम से कम 13 कमरे की आवश्यकता होती है. जबकि विद्यालय में मात्र पांच कमरे हैं, एक में कार्यालय संबंधित कार्य संचालन होता है और एक कमरे में ही पढ़ाई चल पा रही रही है. बाकि कमरों का छत जर्जर होकर खतरनाक स्थितियों में है. जिस वजह से बच्चों को बरामदे पर जमीन पर बिठाकर पठन पाठन कार्य हो रहा है.

बरसात के मौसम में बरामदे पर बच्चों को पढ़ने में कठिनाइयां आ रही हैं. विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का भी घोर अभाव है. विद्यालय में तीन शौचालय तो है, परंतु यूरिनल की व्यवस्था भी नहीं है. साथ ही बच्चों के लिए पेयजल के रुप में चापाकल का ही पानी पीना पड़ रहा है, कोई फिल्टर्ड पेय जल की व्यवस्था नही है.

विभाग को है विद्यालय की स्थिति की जानकारी

वहीं इस पूरे मामले पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार का कहना है कि कमरे की कमी का असर बच्चों के पठन पाठन पर बिल्कुल असर होने नहीं दिया जाता है. बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान रखा जाता है. विद्यालय की स्थिति की जानकारी संबंधित विभाग को दी जा चुकी है.


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By Bipin Kumar Mishra

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