प्यासे को मुंह चिढ़ा रही 87 लाख की लागत से बनी जलमीनार

बछवाड़ा : प्रखंड क्षेत्र में गर्मीं बढ़ने के साथ ही इलाके के जलस्तर में भी गिरावट शुरू हो गया है. जलस्तर नीचे चले जाने के कारण इलाके के सैकड़ों चापाकलों से पानी निकलना बंद हो गया है. जिस कारण पानी की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है. वहीं मुख्यालय स्थित पीएचइडी परिसर में करीब दस […]

बछवाड़ा : प्रखंड क्षेत्र में गर्मीं बढ़ने के साथ ही इलाके के जलस्तर में भी गिरावट शुरू हो गया है. जलस्तर नीचे चले जाने के कारण इलाके के सैकड़ों चापाकलों से पानी निकलना बंद हो गया है. जिस कारण पानी की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है. वहीं मुख्यालय स्थित पीएचइडी परिसर में करीब दस साल पूर्व लाखों रुपये की लागत से बनी जलमीनार शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है.

स्थानीय लोगों की मानें तो निर्माण के बाद आमजनों को प्यास बुझाने के लिए जलमीनार बनाने के साथ ही विभिन्न सड़क किनारे नल लगाने की व्यवस्था की गयी थी. परंतु विभागीय उदासीनता एवं उचित देखरेख के अभाव में जलमीनार से लोगों की प्यास तो नहीं बुझ सकी. बल्कि जगह-जगह बने हजारों रुपये की लागत से नल एवं चबूतरा भी क्षतिग्रस्त हो गया.
ग्रामीण नारेपुर निवासी पूर्व सरपंच गीता देवी, डॉ शैलेंद्र शर्मा त्यागी, नलिनी रंजन, पंकज कुमार, दिनेश कुमार, अभिषेक कुमार, मनोज कुमार झमटिया गांव निवासी राजकुमार चौधरी आदि दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि करीब दस साल पूर्व करीब 87 लाख रुपये की लागत से प्रखंड कार्यालय में जलमीनार का निर्माण किया गया था.
तब ग्रामीणों को शुद्ध जल मिलने की आस जगी थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी सही और सुचारू रूप से जलापूर्ति नहीं होने से इलाके के ग्रामीणों की आस पर पानी फिर गया. ग्रामीणों का कहना था कि जलमीनार निर्माण के साथ-साथ ही जल सप्लाई के लिए प्रखंड कार्यालय समेत थाना रोड, बछवाड़ा बाजार, झमटिया गांव समेत विभिन्न इलाके में पाइपलाइन और नल प्वाइंट की व्यवस्था की गयी थी.
लेकिन जलमीनार बनने करीब पांच साल बाद संचालक द्वारा किसी तरह से जलमीनार को संचालित किया गया. लेकिन कभी नियमित जलापूर्ति नहीं हो सकी. जगह-जगह पाइपलाइन फटे रहने के कारण कभी इलाके के लोगों को शुद्ध जल नहीं मिल सका. कभी अगर जलमीनार चालू भी होती थी. तो लोग मवेशी धोने का काम करते थे. लेकिन बीते तीन माह से पूरी तरह से जलमीनार बंद है.
ग्रामीणों का कहना है कि मामले को लेकर पीएचइडी विभाग के अधिकारी को कई बार जलमीनार चालू कर शुद्ध पानी दिये जाने की मांग की गयी. लेकिन शुद्ध पानी चालू नहीं हो सका. पीएचइडी विभाग के एसडीओ से संपर्क करने की कोशिश की गयी. लेकिन बात नहीं हो सकी. इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ विमल कुमार ने बताया कि मामले को लेकर विभागीय पदाधिकारी को अवगत कराया जायेगा.

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