बांकीपुर में BJP की हार की अंदरूनी कहानी, समीक्षा बैठक में खुलीं कई परतें, नैरेटिव से लेकर राशन कार्ड तक पर हुई चर्चा

Bihar BJP Meeting: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद बिहार भाजपा ने इसकी वजहों की गहन समीक्षा की. पार्टी की बैठक में कई अहम कारण सामने आए, जिनमें विरोधियों का नैरेटिव, राशन कार्ड की समस्या, किसानों की नाराजगी, नीट आंदोलन और बूथ मैनेजमेंट की कमियां प्रमुख रहीं.

Bihar BJP Meeting: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद बिहार भाजपा अब आत्ममंथन में जुट गई है. बुधवार को प्रदेश कार्यालय में करीब दो घंटे तक चली अहम बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, मंत्री, सांसद, विधायक और कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. बैठक का मकसद सिर्फ हार की समीक्षा करना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि आखिर पार्टी से कहां चूक हुई.

किन वजहों पर हुई सबसे ज्यादा चर्चा?

भाजपा सूत्रों के मुताबिक, बैठक में नेताओं से एक-एक कर फीडबैक लिया गया. समीक्षा के दौरान कई ऐसे मुद्दे सामने आए, जिन्होंने चुनावी नतीजे को प्रभावित किया. सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि चुनाव के दौरान विरोधियों ने कई मुद्दों पर अपना नैरेटिव मजबूत बना लिया, लेकिन भाजपा उसकी प्रभावी तरीके से काट नहीं कर सकी. नेताओं का मानना रहा कि इसका सीधा असर मतदाताओं पर पड़ा.

'कुत्ता-बिल्ली' वाले बयान का नैरेटिव पड़ा भारी

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि भाजपा के किसी नेता ने यह नहीं कहा था कि बांकीपुर में पार्टी 'कुत्ता-बिल्ली' को भी टिकट दे देगी तो वह जीत जाएगा. लेकिन विरोधियों ने इसी बात को चुनावी मुद्दा बना दिया. भाजपा नेताओं का मानना है कि पार्टी इस नैरेटिव का समय रहते मजबूती से जवाब नहीं दे सकी.

राशन कार्ड और जमीन के मुद्दे से भी नाराजगी

समीक्षा में यह भी सामने आया कि राशन कार्ड बनवाने में लोगों को हो रही परेशानियों का असर चुनाव पर पड़ा. इसके अलावा सेटेलाइट टाउनशिप के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण को लेकर भी कुछ इलाकों में नाराजगी देखने को मिली. नेताओं का मानना है कि इन स्थानीय मुद्दों को गंभीरता से लेना चाहिए था.

युवाओं की नाराजगी भी बनी वजह

बैठक में नीट आंदोलन का भी जिक्र हुआ. नेताओं ने माना कि इस मुद्दे का असर खासकर युवाओं के बीच दिखाई दिया. इसके साथ ही भरत तिवारी एनकाउंटर प्रकरण को लेकर भी कुछ मतदाताओं में नाराजगी की बात सामने आई.

उम्मीदवार बदलने का भी पड़ा असर

भाजपा नेताओं ने माना कि चुनाव के बीच में उम्मीदवार बदलने से विरोधियों को हमला करने का मौका मिला. इसका भी चुनावी माहौल पर असर पड़ा.

समीक्षा में बूथ प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठे. कई जगह बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को उनके अपने इलाके की बजाय दूसरे बूथों पर तैनात कर दिया गया. इससे मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने में दिक्कत हुई.

बिहार की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि नीट आंदोलन के मामले में बिहार सरकार ने देश में सबसे पहले केस वापस लेने का फैसला किया था. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार युवाओं के लिए कई योजनाएं चला रही हैं. इन योजनाओं की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए.

आगे की रणनीति क्या होगी?

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि हार से सबक लेना जरूरी है. जिन कारणों की पहचान हुई है, उन पर तेजी से काम किया जाएगा. उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने और विरोधियों के हर मुद्दे का तथ्यों के साथ जवाब देने को कहा.

भाजपा अब इस समीक्षा को आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी का आधार मान रही है. पार्टी का फोकस संगठन को और मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों पर तेजी से काम करने और मतदाताओं से बेहतर संवाद बनाने पर रहेगा.

Also Read: बिहार सरकार 60 लाख रुपये प्रतिमाह किराये पर लेगी हेलीकॉप्टर, अब आसमान से देख सकेंगे राजगीर, वाल्मीकिनगर और मां मुंडेश्वरी धाम की खूबसूरती



प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By अभिनंदन पांडेय

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >