मधुसूदन मंदिर में मनेगी अनोखी होली, चंद्रग्रहण के बीच निभेगी सदियों पुरानी परंपरा

आस्था और परंपरा के संगम स्थल मंदार में इस वर्ष भी भगवान मधुसूदन की ऐतिहासिक होली दो और तीन मार्च को हर्षोल्लास के साथ मनायी जायेगी.

संजीव पाठक, बौंसी. आस्था और परंपरा के संगम स्थल मंदार में इस वर्ष भी भगवान मधुसूदन की ऐतिहासिक होली दो और तीन मार्च को हर्षोल्लास के साथ मनायी जायेगी. खास बात यह है कि इस बार होली का उत्सव चंद्र ग्रहण के दिन पड़ रहा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विभिन्न तरह की धारणाएं बनी हुई हैं. मधुसूदन मंदिर के पंडित अवधेश ठाकुर ने बताया कि यहां की परंपरा अन्य स्थानों से थोड़ी अलग है. मंदिर की मान्यता के अनुसार भगवान मधुसूदन होली के अवसर पर गर्भगृह से बाहर निकलकर मंदिर प्रांगण के बाहर में बने फगदोल पर विराजमान होते हैं और श्रद्धालु उनके साथ रंगोत्सव का आनंद लेते हैं. यह दृश्य अत्यंत मनोहारी और भक्तिभाव से परिपूर्ण होता है.

ग्रहण काल और परंपरा का संतुलन

पंडित अवधेश ठाकुर के अनुसार चंद्र ग्रहण 5:45 बजे संध्या से आरंभ होगा और 6:45 बजे मोक्ष होगा. मंदिर परंपरा के अनुसार ग्रहण लगने से लेकर मोक्ष तक का एक घंटा ही सूतक काल माना जायेगा. हालांकि सामान्य मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण में सूतक 9 घंटे पूर्व और सूर्य ग्रहण में 12 घंटे पूर्व से लग जाता है, लेकिन मंदार क्षेत्र की परंपरा विशिष्ट है. यहां केवल वास्तविक ग्रहण अवधि को ही मान्य माना जाता है. इसलिए ग्रहण मोक्ष के बाद भगवान मधुसूदन गर्भगृह से बाहर निकलेंगे और भव्य होली उत्सव आरंभ होगा.

फगदोल पर विराजेंगे भगवान

ग्रहण समाप्ति के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा, संध्या आरती और भोग अर्पित होगा. इसके पश्चात भगवान मधुसूदन फगदोल पर विराजमान होंगे और श्रद्धालु अबीर-गुलाल के साथ होली मनायेंगे. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे किसी भी परिस्थिति में टाला नहीं जाता. मालूम हो की मंदार की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि श्रद्धा और परंपरा का जीवंत उदाहरण है. ग्रहण को लेकर अलग-अलग मान्यताओं के बावजूद यहां की परंपरा अडिग है. दो और तीन मार्च को मंदार क्षेत्र भक्तिमय रंगों से सराबोर रहेगा, जहां भगवान स्वयं भक्तों के बीच आकर होली खेलेंगे. यही इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता है.

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By SHUBHASH BAIDYA

SHUBHASH BAIDYA is a contributor at Prabhat Khabar.

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