Green Bihar Campaign: शंभुगंज प्रखंड के +2 उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय वारसाबाद में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित बिहार अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने पौधारोपण कर पर्यावरण बचाने तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया.
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से दिया हरियाली का संदेश
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती लेखनी कुमारी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में बिहार सरकार द्वारा निर्धारित 70 पौधे लगाने के लक्ष्य की जानकारी दी गई. उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो धरती मां को भी सुरक्षित और हरा-भरा बनाया जा सकता है.
वृक्षों के वैज्ञानिक महत्व से कराया अवगत
कार्यक्रम के दौरान विज्ञान शिक्षक अनुराग कुमार ने विद्यार्थियों को वृक्षों के वैज्ञानिक महत्व की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पेड़ प्राकृतिक फिल्ट्रेशन सिस्टम की तरह कार्य करते हैं. वृक्ष वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सहित हानिकारक गैसों को अवशोषित कर शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जिससे प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है. उन्होंने छात्रों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की.
इको क्लब के छात्रों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
इको क्लब के नोडल शिक्षक सत्यम कुमार ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए हमेशा जागरूक रहने का संदेश दिया. कार्यक्रम में सहयोगी शिक्षक प्रभात कुमार, विकास कुमार, अभिषेक कुमार, सत्यम सिंह, अर्चना कुमारी एवं बिहारी भी उपस्थित रहे.
पौधारोपण कर लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम में इको क्लब के छात्र-छात्राओं लक्ष्मी, मौसम, रेशम, रानी, अनुपम, रूबी, स्वीटी, मनीष, आर्यन, हिमांशु और ऋषु सहित अनेक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण किया. सभी ने पौधों की देखभाल करने और अधिक से अधिक लोगों को वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया.
हरित भविष्य के लिए जागरूकता बढ़ाने पर जोर
विद्यालय प्रशासन ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना और अधिक से अधिक वृक्षारोपण के साथ पौधों के संरक्षण की भावना को मजबूत करना है. शिक्षकों ने कहा कि प्रकृति की सुरक्षा के बिना स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती.
