मिश्राचक में गूंजा भक्ति का स्वर, भागवत कथा में उमड़े श्रद्धालु
Banka News : हरि बोल और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजता कथा पंडाल, भजनों पर झूमते श्रद्धालु और भक्तिरस में डूबा पूरा गांव. बौंसी के मिश्राचक में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया है.
बांका ( बौंसी ) से संजीव पाठक की रिपोर्ट : बौंसी प्रखंड क्षेत्र के मिश्राचक गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. कथा पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन सुन श्रद्धालु भक्तिभाव में डूब गये. पूरा वातावरण भजन-कीर्तन और जयकारों से भक्तिमय बना रहा.
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ वर्णन
कथाव्यास गोविंद शरण महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्व से अवगत कराया.उन्होंने कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, नंदोत्सव और गोकुल की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया. कथावाचक ने बताया कि जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ गया और कंस का आतंक फैल गया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लेकर धर्म की स्थापना का संकल्प लिया.
पूतना वध से लेकर कालिय नाग दमन तक की कथा
कथा के दौरान पूतना वध, शकटासुर वध और कालिय नाग दमन की घटनाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया. श्रद्धालुओं को बताया गया कि भगवान सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और अधर्म का अंत निश्चित है.गोवर्धन लीला प्रसंग सुनाते हुए कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को समाप्त कर गोकुलवासियों की रक्षा की थी. उन्होंने कहा कि अहंकार का अंत तय है और सच्ची भक्ति ही भगवान को प्रिय होती है.
भजनों पर झूम उठे श्रद्धालु
कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों और कीर्तन पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे. पंडाल में गूंजते “हरि बोल” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिरस में डूबा नजर आया.कथाव्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को सही दिशा देने वाली दिव्य धारा है. भागवत श्रवण से मनुष्य के भीतर का अज्ञान और मोह समाप्त होता है तथा आत्मिक शांति प्राप्त होती है.
आयोजन को सफल बनाने में जुटे ग्रामीण
धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्य रमन मिश्रा, रौनक, अक्षय, मयंक, आनंद, प्रीतम और आयुष रंजन समेत गांव के सभी लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से पूरा मिश्राचक गांव भक्तिमय माहौल में सराबोर दिख रहा है.