मंदार की तराई के अष्टकमल मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भगवान विष्णु की पूजा कर भक्तों ने मांगी सुख-शांति

बांका के ऐतिहासिक मंदार की तराई में स्थित अष्टकमल मंदिर गुरुवार को आस्था का केंद्र बना रहा. हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. केले के पेड़ की विशेष पूजा भी की गई.

बांका जिले के बौंसी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक मंदार की तराई में पापहारिणी सरोवर के बीच अवस्थित अष्टकमल मंदिर गुरुवार को श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहा. सुबह पांच बजे मंदिर का पट खुलते ही भगवान विष्णु के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ पहुंचने लगी. श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की कामना की.

सुबह पांच बजे खुला मंदिर का पट

अष्टकमल मंदिर का पट सुबह पांच बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया. सुबह 7.30 बजे भगवान विष्णु की आरती और पूजा होगी. इसके बाद दोपहर 12 बजे भगवान को भोग लगाया जायेगा. दोपहर एक बजे मंदिर का पट फिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जायेगा, ताकि भक्त भगवान का दर्शन कर सकें.

संध्या 6.30 बजे पापहारिणी सरोवर के तट पर महाआरती का आयोजन होगा. इसके बाद भगवान को भोग लगाया जायेगा. शाम 7.30 बजे के बाद मंदिर का पट दोबारा बंद कर दिया जायेगा.

वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच होती है पूजा

मंदिर के पुजारी भुवनेश्वर उर्फ भवेश झा, विभूति पाठक और लखन झा ने बताया कि अष्टकमल मंदिर में प्रतिदिन पूरी नेम-निष्ठा के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना होती है. धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा के दौरान विशेष विधि-विधान का पालन किया जाता है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान विष्णु का आशीर्वाद लेकर परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं.

केले के पेड़ की पूजा को लेकर विशेष मान्यता

गुरुवार को विभिन्न जगहों पर श्रद्धालुओं ने केले के पेड़ की भी पूजा-अर्चना की. धार्मिक मान्यता है कि केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है. इसी विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने केले के पेड़ की पूजा कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना की.

अन्य मंदिरों में भी हुई विशेष पूजा

बांका शहर के भयहरण स्थान, बाबूटोला स्थित पंचमुखी मंदिर, जगतपुर स्थित ठाकुरबाड़ी सहित अन्य मंदिरों में भी गुरुवार सुबह विशेष पूजा-अर्चना की गयी. श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के पट सुबह पांच बजे ही खोल दिये गये. मंदार मधुसूदन मंदिर में भी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की गयी.

सुबह 7.30 बजे पुजारी बिंदेश्वरी उर्फ पटल झा और लक्ष्मण झा द्वारा भगवान को पंचामृत से स्नान कराया जायेगा. दोपहर 12 बजे भगवान को भोग लगाया जायेगा, जबकि शाम छह बजे श्रृंगार पूजा और भव्य आरती का आयोजन होगा. धार्मिक आयोजनों को लेकर मंदार और आसपास के मंदिरों में दिनभर भक्तिमय माहौल बना रहेगा.


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लेखक के बारे में

By चंदन कुमार

चंदन कुमार बांका में प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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