बांका जिले के विभिन्न मंदिरों और देवालयों में बुधवार को प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती का भव्य आयोजन किया गया. सुबह तड़के से ही मंदिरों में गजानन के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. भक्तों ने पूरे विधि-विधान से भगवान गणेश को गंगाजल से स्नान कराकर सिंदूर का तिलक लगाया और सुख, समृद्धि तथा खुशहाली की मनोकामना की.
विधि-विधान से हुआ गजानन का पूजन और भोग
बुधवार की सुबह 05:00 बजे ही जिले के सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट (पट) श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे:
- पूजन विधि: श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश को गंगाजल से पवित्र स्नान कराने के बाद लाल सिंदूर, अक्षत और गेंदे के फूल अर्पित किए.
- भोग और आरती: गजानन को उनके प्रिय मोदक (लड्डू) और मौसमी फलों का भोग लगाया गया. तत्पश्चात धूप, दीप और शुद्ध देसी घी से आरती उतारकर भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.
शहर के प्रमुख मंदिरों में गूंजे भगवान के जयकारे (आज का दर्शन)
शहर के प्रसिद्ध भयहरण स्थान, बाबूटोला स्थित पंचमुखी मंदिर, पुरानी ठाकुरबाड़ी और शनि मंदिर सहित कई देवालयों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए:
भयहरण स्थान के पुजारी दिनेश झा ने बताया: "सुबह से ही भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है. संध्या के समय भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न मोहल्लों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. पूरा माहौल गजानन के जयकारों से भक्तिमय हो उठा."
मंदार के मधुसूदन मंदिर में भी दिखी अपार आस्था
बांका के प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल मंदार स्थित मधुसूदन मंदिर में भी परंपरा के अनुसार भगवान गणेश और प्रभु मधुसूदन की पूजा-अर्चना की गई. शाम को महाआरती के बाद उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया. धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से भगवान गणेश की आराधना करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
