Shravani Mela 2026 : श्रावणी मेला के दौरान कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं की अनूठी दिनचर्या लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है. मार्ग में बने अर्द्धनिर्मित पंडालों, सरकारी विद्यालयों और अन्य सुरक्षित भवनों में कांवरियों के जत्थे अस्थायी डेरा डालकर विश्राम कर रहे हैं. यात्रा के दौरान वे पूरी टोली के साथ मिलकर भोजन तैयार करते हैं और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण कर आगे की यात्रा शुरू करते हैं.
अस्थायी रसोई में खुद बनाते हैं भोजन
मंगलवार को कटोरिया प्रखंड के अबरखा स्थित पर्यटन विभाग के पंडाल में धनबाद जिले से आए कांवरियों का जत्था सामूहिक रूप से भोजन तैयार करता दिखाई दिया. भोजन बनने के बाद सभी श्रद्धालु कतारबद्ध होकर एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते नजर आए. शिवभक्तों ने बताया कि यात्रा के दौरान स्वयं तैयार किया गया ताजा और शुद्ध भोजन उन्हें नई ऊर्जा देता है और लंबी पैदल यात्रा के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार रखता है.
'बोल बम' के जयघोष के साथ फिर बढ़ते हैं कदम
भोजन और कुछ देर विश्राम के बाद पूरा जत्था "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर रवाना हो जाता है. पूरे पंडाल में भक्ति, अनुशासन और सामूहिक सहयोग का वातावरण देखने को मिलता है. श्रद्धालुओं का उत्साह और आपसी समन्वय श्रावणी यात्रा की विशेष पहचान बन गया है.
यात्रा को यादगार बना रहा सामूहिक भोजन
श्रद्धालुओं का कहना है कि सामूहिक रूप से भोजन बनाना और एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करना उनकी यात्रा को और अधिक यादगार बना देता है. इस दौरान सभी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं, जिससे पूरी टोली में अपनापन और भाईचारे की भावना मजबूत होती है. यही परंपरा श्रावणी यात्रा को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी विशेष बनाती है.
सेवा शिविरों की सुविधाओं से संतुष्ट दिखे श्रद्धालु
कांवरिया पथ पर बने विश्राम स्थलों और विभिन्न सेवा शिविरों में उपलब्ध सुविधाओं की भी श्रद्धालुओं ने सराहना की. उनका कहना है कि यात्रा के दौरान मिलने वाली आवश्यक सुविधाएं और स्वयंसेवकों का सहयोग इस कठिन यात्रा को आसान बना रहा है. श्रावणी मेला में आस्था, सेवा, अनुशासन और भाईचारे का यह अनूठा संगम हर आने वाले श्रद्धालु के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन रहा है.
