भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि इस बार 4 सितंबर को पड़ रही है. इसी दिन देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा. पंडित मनोज दुबे ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का लड्डू गोपाल स्वरूप में जन्म होगा. मंदिरों से लेकर घरों तक विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और जन्मोत्सव की तैयारियां देखने को मिलेंगी. पंडित मनोज दुबे के अनुसार इस बार पंचमी तिथि की हानि होने के कारण कृष्ण पक्ष 14 दिनों का ही होगा.
जन्माष्टमी से पहले बहुला चौथ, संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है व्रत
जन्माष्टमी से पहले आने वाली बहुला चतुर्थी का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना गया है. इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखती हैं. साथ ही भगवान गणेश की पूजा कर मनोवांछित फल की कामना की जाती है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बहुला चौथ के दिन भगवान गणेश के साथ बहुला गाय, उसके बछड़े और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है. इस दिन गौ सेवा का भी विशेष विधान बताया गया है. मान्यता है कि गाय को हरा चारा या अनाज खिलाने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और घर में धन की कमी दूर होती है.
भाद्रपद में मांगलिक कार्य भले कम, लेकिन पर्वों की रहेगी भरमार
सनातन परंपरा में भाद्रपद मास को विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए सामान्यतः उपयुक्त नहीं माना जाता, लेकिन व्रत और त्योहारों की दृष्टि से यह महीना बेहद समृद्ध है. इस पूरे महीने में एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व आते हैं.
जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है. भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा, झांकी सजाने और भजन-कीर्तन के साथ मध्यरात्रि में जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है. मंदिरों में भी विशेष सजावट और पूजा-अर्चना की जाती है.
4 सितंबर को जन्माष्टमी, फिर तीज और ऋषि पंचमी
सितंबर महीने में कई प्रमुख व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं. 4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी मनायी जाएगी. इसके बाद 14 सितंबर को हरतालिका तीज और 15 सितंबर को ऋषि पंचमी का पर्व होगा.
हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं. वहीं ऋषि पंचमी पर सप्तऋषियों की पूजा की जाती है.
पद्मा एकादशी से अनंत चतुर्दशी तक धार्मिक आयोजनों की धूम
सितंबर में 22 सितंबर को पद्मा एकादशी और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा. अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा के साथ कई स्थानों पर गणेश उत्सव का समापन भी होता है.
सितंबर के प्रमुख व्रत और त्योहार
कृष्ण जन्माष्टमी — 4 सितंबर
हरतालिका तीज — 14 सितंबर
ऋषि पंचमी — 15 सितंबर
पद्मा एकादशी — 22 सितंबर
अनंत चतुर्दशी — 25 सितंबर
इस तरह सितंबर का महीना धार्मिक आस्था और पर्व-त्योहारों के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है. जन्माष्टमी से शुरू होने वाला यह धार्मिक सिलसिला महीने के अंत तक श्रद्धालुओं को लगातार पूजा-पाठ और व्रत के अवसर देता रहेगा.
