Sawan Last Somwari Kanwariya Banda: चिलचिलाती धूप, उमस भरी गर्मी और तपती सड़कें. मौसम की सख्ती ऐसी कि कुछ देर बाहर खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाए. लेकिन सावन की अंतिम सोमवारी पर शिवभक्तों की आस्था के सामने यह गर्मी भी फीकी पड़ गयी. रविवार देर दोपहर से ही भागलपुर के बरारी घाट से गंगाजल लेकर कांवरियों और डाक बमों के जत्थे पंजवारा की ओर बढ़ने लगे. रास्ते में कहीं तेज कदमों से दौड़ते डाक बम दिखे, तो कहीं कांवर लेकर भोलेनाथ के जयकारे लगाते श्रद्धालु नजर आये.
“बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से इलाके के शिवालय गूंज उठे हैं. अंतिम सोमवारी को लेकर श्रद्धालुओं में ऐसा उत्साह है कि तपती गर्मी भी उनके कदमों को रोक नहीं पा रही है.
बरारी घाट से जल लेकर निकले हजारों शिवभक्त
सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर भागलपुर के बरारी घाट पर रविवार से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी. हजारों की संख्या में डाक बम और सामान्य कांवरिए गंगा से पवित्र जल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए.
पंजवारा और आसपास के शिवालयों में देर शाम से ही कांवरियों की आवाजाही बढ़ गयी. रात बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ती गयी. कई डाक बम तेज रफ्तार से अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ते रहे.
इन श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है. कई कांवरियों के लिए यह आस्था, संकल्प और वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ा अवसर है. यही वजह है कि गर्मी, थकान और लंबी दूरी के बावजूद उनके उत्साह में कमी नहीं दिखी.
बाबा लबोखर नाथ मंदिर में रात से लगी कतार
अंतिम सोमवारी को लेकर बाबा लबोखर नाथ मंदिर में विशेष तैयारियां की गयी हैं. रात से ही यहां भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गयीं.
श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आये. मंदिर परिसर में लगातार धार्मिक जयकारे गूंजते रहे.
वहीं बाबा कटश्टहर नाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है. “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के नारों से पूरा परिसर भक्तिमय बना हुआ है.
नर्मदेश्वर और गढिंनाथ महादेव मंदिर में भी उमड़ी भीड़
पंजवारा क्षेत्र के बाबा नर्मदेश्वर मंदिर और बाबा गढिंनाथ महादेव मंदिर में भी जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.
सावन की अंतिम सोमवारी होने के कारण इन मंदिरों में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ है. श्रद्धालुओं का लगातार पहुंचना यह बताता है कि इस बार भी अंतिम सोमवारी को लेकर लोगों में खास उत्साह है.
पहाड़ पर बसे शिव मंदिर तक भी पहुंच रहे भक्त
आस्था का एक अलग दृश्य पैर पहाड़ शिव मंदिर में देखने को मिल रहा है. दुर्गम रास्तों और भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालु पहाड़ पर स्थित मंदिर तक पहुंच रहे हैं.
कई भक्तों के लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं है. इसके बावजूद वे कठिन रास्ते की परवाह किये बिना बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं.
तपती सड़क, पसीने से भीगे चेहरे और कंधे पर कांवर. इन दृश्यों के बीच भक्तों के जयकारे गर्मी की परेशानी पर भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं.
पांच किलोमीटर तक चला सफाई अभियान
कांवरियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भी उनकी सुविधा का ध्यान रखा गया है. लौंढिया खुर्द पंचायत और पंजवारा पंचायत के स्वच्छता पर्यवेक्षकों दिलीप पासवान और अक्षय कुमार के नेतृत्व में करीब पांच किलोमीटर के दायरे में विशेष सफाई अभियान चलाया गया.
सड़क के दोनों ओर सफाई करायी गयी, ताकि डाक कांवरियों और अन्य श्रद्धालुओं को आवाजाही में परेशानी नहीं हो.
गर्मी के बीच साफ-सफाई की यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कांवरिया मार्ग पर एक साथ बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही हो रही है. ऐसे में सड़क किनारे गंदगी जमा होने से श्रद्धालुओं को परेशानी के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है.
रात में रोशनी, रास्ते में सेवा की व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मार्ग के दोनों ओर प्रकाश की व्यवस्था भी की गयी है. रात के समय कांवरियों की आवाजाही को देखते हुए लाइटिंग की व्यवस्था से उन्हें काफी राहत मिलने की उम्मीद है.
इसके अलावा जगह-जगह कांवरियों की सेवा के लिए स्टॉल भी लगाये गये हैं. इन सेवा केंद्रों पर श्रद्धालुओं को राहत देने की कोशिश की जा रही है.
भीषण गर्मी में लंबी दूरी तय कर रहे डाक बमों के लिए रास्ते में मिलने वाली ऐसी स्थानीय मदद काफी अहम साबित हो रही है.
मौसम की मार के बीच आस्था की परीक्षा
इस बार सबसे बड़ी चुनौती गर्मी और उमस है. तेज धूप में पैदल लंबी दूरी तय करना सामान्य व्यक्ति के लिए भी मुश्किल है. ऐसे में कांवर लेकर चलना और डाक बम के रूप में लगातार आगे बढ़ना श्रद्धालुओं के लिए शारीरिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण है.
इसके बावजूद शिवभक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है. किसी के हाथ में कांवर है, तो कोई तेज कदमों से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा है. चेहरे पर थकान के बावजूद जुबान पर “बोल बम” का जयकारा है.
यही दृश्य सावन की अंतिम सोमवारी की आस्था को अलग पहचान दे रहा है.
प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था पर बढ़ी जिम्मेदारी
श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय प्रशासन और सेवा से जुड़े संगठनों की जिम्मेदारी भी बढ़ गयी है. गर्मी को देखते हुए कांवरिया मार्ग पर सफाई, रोशनी और सेवा केंद्रों की व्यवस्था को सुचारु रखना जरूरी है.
भीड़ बढ़ने के साथ यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही भी महत्वपूर्ण होगी. खासकर रात के समय बड़ी संख्या में डाक बमों के गुजरने के कारण मार्ग पर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है.
स्थानीय स्तर पर सफाई और रोशनी की पहल से श्रद्धालुओं को राहत मिल रही है, लेकिन अंतिम सोमवारी तक व्यवस्थाओं को लगातार बनाए रखना प्रशासन और स्थानीय निकायों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी.
Sawan Last Somwari Kanwariya Banda: जयकारों से गूंजता पंजवारा, आगे और बढ़ेगी भीड़
अंतिम सोमवारी को लेकर रविवार देर रात से शुरू हुआ कांवरियों का सिलसिला सोमवार को और तेज होने की संभावना है. अलग-अलग शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम जारी है.
एक ओर गर्मी अपने तेवर दिखा रही है, तो दूसरी ओर शिवभक्तों की आस्था उसे चुनौती देती नजर आ रही है. कंधे पर कांवर, हाथों में गंगाजल और जुबान पर महादेव का नाम लिये श्रद्धालु लगातार आगे बढ़ रहे हैं.
पंजवारा और आसपास का इलाका फिलहाल इसी आस्था के रंग में रंगा हुआ है. तेज धूप और उमस के बीच गूंजता “बोल बम” यही संदेश दे रहा है कि महादेव के भक्तों के लिए मौसम की मुश्किलें भी उनकी श्रद्धा के सामने छोटी पड़ गयी हैं.
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