चांदन (बांका) से अमरेंद्र पांडेय की रिपोर्ट :
प्राथमिक विद्यालय पारडीहमें भवन की कमी शिक्षा व्यवस्था पर भारी पड़ रही है. चांदन पंचायत स्थित इस स्कूल में वर्ग प्रथम से पंचम तक के 45 बच्चों की पढ़ाई सिर्फ दो कमरों में कराई जा रही है. वर्षों से भवन निर्माण की मांग के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है.
दो कमरों में सिमटी पांच कक्षाओं की पढ़ाई
विद्यालय के दो कमरों में से एक कमरे के आधे हिस्से में प्रधानाध्यापक का कार्यालय संचालित किया जा रहा है. ऐसे में बाकी बचे सीमित स्थान में बच्चों की पढ़ाई कराना शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.स्कूल में बहुवर्गीय कक्षा का संचालन कई वर्षों से हो रहा है. एक साथ कई कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने में शिक्षकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इसका असर सीधे बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है.
छह दशक पुराना है स्कूल
प्राथमिक विद्यालय पारडीह की स्थापना वर्ष 1960 में हुई थी. स्थानीय निवासी खादीधारी चौधरी द्वारा जमीन दान देने के बाद वर्ष 1972 में यहां एक कमरे का निर्माण कराया गया था. बाद में पुराने भवन की स्थिति खराब होने पर करीब तीन दशक पहले दो कमरों का नया भवन बनाया गया.लेकिन आज भी उसी दो कमरे में स्कूल का संचालन हो रहा है. स्कूल प्रखंड मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर दूर सुल्तानगंज-देवघर मुख्य सड़क मार्ग के किनारे स्थित है.शिक्षक हैं, लेकिन बुनियादी सुविधा का अभाव
विद्यालय में 45 बच्चों के लिए चार शिक्षक नियुक्त हैं, जिनमें तीन महिला और एक पुरुष शिक्षक शामिल हैं. बावजूद इसके पर्याप्त कमरों की कमी के कारण सभी कक्षाओं का संचालन सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है.बच्चों को खुले मैदान या बरामदे में बैठकर मध्यान्ह भोजन करना पड़ता है. हालांकि स्कूल में रसोईघर, शौचालय और पेयजल की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन भवन और चाहरदिवारी का अभाव बड़ी समस्या बना हुआ है. मुख्य सड़क के किनारे स्कूल होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
