बौसी बांका से संजीव पाठक की रिपोर्ट :
महर्षि मेंही आश्रम में आयोजित इस विशेष धार्मिक कार्यक्रम का नेतृत्व वर्तमान आचार्य स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने किया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संतमत अनुयायी, साधु-संत और स्थानीय श्रद्धालु शामिल हुए. सुबह से ही आश्रम परिसर में पूजा-अर्चना, गुरु वंदना और सत्संग का दौर शुरू हो गया था.माल्यार्पण और पूजा-अर्चना से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत दोनों गुरुदेवों के चित्र पर माल्यार्पण और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुई. श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया. दूर-दराज से पहुंचे अनुयायियों ने भक्ति गीतों और गुरु महिमा के जरिए श्रद्धा अर्पित की. पूरे दिन आश्रम परिसर आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर नजर आया.
स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने दिया आध्यात्मिक संदेश
अपने प्रवचन में स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है. उन्होंने कहा कि आज समाज में बढ़ती अशांति, लोभ और स्वार्थ के बीच संतों की वाणी मानवता को सही दिशा देने का कार्य कर रही है.उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रेम, सद्भाव और सत्य के मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि वास्तविक कल्याण सत्संग, सेवा और साधना में ही निहित है. गुरु कृपा से ही आत्मज्ञान की प्राप्ति संभव है और अच्छे संस्कारों के माध्यम से समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाया जा सकता है.
युवाओं को नशा और हिंसा से दूर रहने की सलाह
प्रवचन के दौरान स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने युवाओं को नशा, हिंसा और अन्य बुराइयों से दूर रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता ही जीवन में शांति, सकारात्मकता और सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है. उनके विचार सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे.भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
कार्यक्रम के समापन पर भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. मौके पर आश्रम समिति के सदस्य, स्थानीय ग्रामीण और संतमत के अनुयायी बड़ी संख्या में मौजूद रहे.
