Nuclear Power Plant: बिहार के बांका जिले में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर लंबे समय से पानी की उपलब्धता अहम मुद्दा था. अब सरकार ने इस अड़चन को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को चांदन और बदुआ जलाशय से पानी उपलब्ध कराया जाएगा. बिहार जल संसाधन विभाग ने इस संबंध में बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड को एनओसी भी जारी कर दी है.
इतनी पानी की होगी व्यवस्था
प्रस्तावित प्लांट भागलपुर और मुंगेर की सीमा से सटे बांका के शंभूगंज प्रखंड में गढ़ी मोहनपुर के पास बनाया जाना है. इसकी प्रस्तावित क्षमता 700 मेगावाट इलेक्ट्रिक होगी और बिजली उत्पादन के लिए दो संयंत्र लगाए जाने हैं. पानी की बात करें तो चांदन और बदुआ जलाशय से 80-80 मिलियन क्यूबिक मीटर, यानी टोटल 160 MCM पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी. लेकिन सरकार ने इसके इस्तेमाल को लेकर कई शर्तें भी तय की हैं.
बदुआ में पानी की कमी हुई तो गंगा आएगी काम
जानकारी के मुताबिक, चांदन जलाशय से पूरे साल पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी, जबकि बदुआ जलाशय से करीब 11 महीने तक पानी मिल सकेगा. अगर बदुआ में पानी की कमी होती है, तो वहां गंगा नदी का पानी पाइप लाइन के जरिए पहुंचाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है. इस तरह से इस परियोजना के लिए सिर्फ पानी का इंतजाम नहीं किया जा रहा, बल्कि जलाशयों में पानी की उपलब्धता बनाए रखने की वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार की जा रही है.
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प्लांट से निकला पानी सीधे जलाशय में नहीं जाएगा
साथ ही न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े होने के कारण पानी की वापसी को लेकर भी सख्त नियम रखे गए हैं. परियोजना को हर साल करीब 22 MCM रेडिएशन-मुक्त पानी फ्लोबैक के रूप में बदुआ जलाशय में वापस प्रवाहित करना होगा. बिजली उत्पादन के बाद निकलने वाले पानी को संबंधित पर्यावरणीय मानकों के अनुसार ट्रीट करना होगा. इसके बाद ही उसे रेडिएशन-मुक्त करके जलाशयों में वापस भेजा जाएगा.
नियम टूटे तो NOC भी हो सकती है रद्द
जानकारी के मुताबिक, जलापूर्ति व्यवस्था के निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा. निर्माण के बाद निकलने वाले कचरे को हटाने की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी की होगी. अगर परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की जरूरत पड़ती है, तो उसका खर्च निर्माण एजेंसी को उठाना होगा. साथ ही एनओसी की शर्तों का उल्लंघन होने पर जल संसाधन विभाग इसे रद्द भी कर सकता है.
4 से बढ़कर 11 महीने हुई पानी की अवधि
इस परियोजना के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर नियमों में भी बदलाव हुआ है. पहले बदुआ जलाशय से लगातार चार महीने पानी उपलब्ध कराने का प्रावधान था. बाद में केंद्रीय जल आयोग की सहमति के बाद इसे बढ़ाकर 11 महीने कर दिया गया.
