अच्छी फसल की कामना के साथ मंदार क्षेत्र में मनाया गया नवान्न

अंग क्षेत्र के साथ-साथ मंदार क्षेत्र के लोक आस्था का पर्व नवान्न हर्षोल्लास के साथ रविवार को संपन्न हुआ.

भगवान मधुसूदन को दही, चूड़ा, गुड़, केला का लगाया गया भोग

बौंसी. अंग क्षेत्र के साथ-साथ मंदार क्षेत्र के लोक आस्था का पर्व नवान्न हर्षोल्लास के साथ रविवार को संपन्न हुआ. सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने नगर व प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में अपने-अपने इष्ट देव को नया अन्न प्रसाद के रूप में अर्पित किया. इस दौरान मंदिरों में कृषि, संस्कृति और धर्म का संगम देखने को मिला. मुख्य रूप से ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मधुसूदन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ सुबह से ही आनी आरंभ हो गयी थी. भक्तों ने भगवान को दही, चूड़ा और गुड़ का भोग अर्पित किया. मधुसूदन मंदिर में सुबह भगवान को पंचामृत स्नान के बाद नए वस्त्र पहनाये गये. पुजारी के पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने उनकी पूजा की.

धान की नयी फसल के तैयार होने पर मनाया जाता है पर्

परंपरा के अनुसार अगहन माह के शुक्ल पक्ष पंचमी को मनाये जाने वाला यह पर्व धान की नयी फसल के तैयार होने पर मनाया जाता है. पर्व के दिन भी रविवार को लोगों ने बाजार में दही, चूड़ा, केला, गुड़, मूली, आदि की जमकर खरीदारी की. नवान्न पर्व का मंदार क्षेत्र में बहुत ही धार्मिक महत्व है. ऐसी मान्यता है कि तैयार धान का पहला फसल भगवान व इष्टदेव को भोग लगाने के बाद ही घर में व्यवहार में लाया जाता है. इससे किसानों को साल भर सुख-समृद्धि बनी रहती है. घरों में भी लोगों ने अपने-अपने कुल देवता और कुलदेवी की विधि विधान से पूजा-अर्चना कर भोग लगाया. कई जगहों में माता अन्नपूर्णा, धरती माता और पितरों को भी अन्न अर्पित किया गया. सामाजिक कार्य से जुड़े निर्मल झा और पंडित अवधेश ठाकुर ने संयुक्त रूप से बताया कि यह पर्व सिर्फ नये अन्न का भोग नहीं, बल्कि हमारी मिट्टी, खेती और संस्कृति के प्रति कृतज्ञता और आस्था का उत्सव है. जब किसान अपनी मेहनत की उपज का प्रथम अंश भगवान मधुसूदन को समर्पित करते हैं तभी वर्षभर की समृद्धि, शांति और मंगल की कामना पूरी होती है.

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By SHUBHASH BAIDYA

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