मानसिक व आर्थिक बोझ है मृत्युभोज, परंपरा से बाहर निकलने की है जरूरत- सांसद

किसी की मृत्यु के बाद शांतिपूजा होने से परिवारजनों को मानसिक संतुष्टि मिलती है. लेकिन मृत्युभोज कष्टदायक बना हुआ है.

– शांतिपूजा से मानसिक संतुष्टि पर मृत्युभोज से आर्थिक नुकसान बांका. अपना समाज सदियों से कई रूढ़िवादियों परंपराओं से जकड़ा हुआ है. इसमें प्रमुख रूप से मृत्युभोज भी शामिल है. अक्सर देखा जाता है कि किसी के भी परिवार में मृत्यु होने के बाद परिजन व समाज दुख से घिर जाता है. ऐसे में निर्धारित समय के अंदर परिजनों के लिए मृत्युभोज देने की परंपरा से उनके ऊपर शारीरिक, मानसिक व आर्थिक बोझ आ जाता है. जिसे लोग पुराने परंपराओं के निर्वहन के नाते झेलते हैं. आज का समय इन परिस्थितियों से बाहर निकलने का है. 21वीं सदीं के भारत में लोगों को ऐसे मृत्युभोज से बाहर निकलने की आवश्यकता है. उक्त बातें बांका के सांसद गिरिधारी यादव ने गुरूवार को फुल्लीडुमर के पथलकुडिया गांव में दिवंगत नूनेश्वर यादव को श्रद्धांजलि देते हुए कही. कहा कि किसी की मृत्यु के बाद शांतिपूजा होने से परिवारजनों को मानसिक संतुष्टि मिलती है. लेकिन मृत्युभोज कष्टदायक बना हुआ है. मालूम हो कि सांसद ने अपने जीवन काल में शुरू से ही मृत्युभोज के विरूद्ध लोगों को जागरूक करते आ रहे हैं. यही नहीं सांसद किसी के भी मृत्युभोज में शामिल भी नहीं होते हैं. कार्यकर्ताओं के पूछे जाने पर अक्सर सांसद बताते हैं कि दुख में कर्ज लेकर किया गया यह भोज समाज के लिए हितकर नहीं है. लोगों को ऐसे भोज से बचने की अपील की है. सांसद ने कहा कि मृत्युभोज एक कुप्रथा एवं सामाजिक व आर्थिक अभिशाप है. मृत्युभोज के आयोजन से दुखी परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ता है. देश के कुछ राज्यों में कानूनी रूप से मृत्युभोज पर रोक भी लगायी गयी है. अन्य राज्यों की तरह यहां भी इसका प्रावधान हो. उधर पथलकुडिया गांव में गुरूवार को सांसद ने विजय यादव के पिता की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए परिवारजनों से मिलकर दुख की घड़ी में उन्हें सांत्वना दिया. साथ ही मृत्युभोज नहीं करने की अपील की. इस मौके पर पूर्व जिप सदस्य नरेश यादव, पूर्व पंसस मुकेश यादव, सांसद प्रतिनिधि कौशल किशोर सिंह, सरपंच प्रतिनिधि उमेश चंद्र यादव, इंद्रदेव यादव, राजेंद्र यादव सहित अन्य मौजूद थे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: SHUBHASH BAIDYA

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >