बांका, भागलपुर समेत दक्षिण बिहार के अन्य जिलों में 23 से 27 सितंबर तक मौसम का मिजाज बदला रहने की संभावना है. इस दौरान आसमान में घने बादल छाये रह सकते हैं और जिले के कुछ स्थानों पर गरज-चमक व तेज हवा के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं. बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा और भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी 22 सितंबर के मौसम बुलेटिन में यह पूर्वानुमान जारी किया गया है.
30 से 32 डिग्री के बीच रहेगा अधिकतम तापमान
मौसम बुलेटिन के अनुसार इस अवधि में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है. सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 75 से 80 प्रतिशत और दोपहर में 65 से 70 प्रतिशत तक रह सकती है. करीब 6 से 7 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूरबा हवा चलने का अनुमान है.
बदलते मौसम और मानसून के उतार-चढ़ाव को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों और पशुपालकों के लिए कई जरूरी सुझाव भी जारी किये हैं.
खेतों में जलभराव होने पर तत्काल पानी निकालें
किसानों को निचली भूमि में तीन से सात दिनों तक जलभराव और आंशिक फसल क्षति की स्थिति में तत्काल खेत से पानी निकालने की सलाह दी गयी है. क्षतिग्रस्त स्थानों पर स्वस्थ पौधों से दोबारा रोपाई करने और पानी निकलने के बाद आवश्यक पौध संरक्षण उपाय अपनाने को कहा गया है.
यदि धान की फसल लंबे समय तक पानी में डूबने के कारण पूरी तरह नष्ट हो जाती है, तो खेत की स्थिति और बुआई के समय को ध्यान में रखते हुए सरसों, मसूर, मटर या तोरिया जैसी कम अवधि वाली रबी फसल लगाने की सलाह दी गयी है.
मक्का और अरहर की फसल को लेकर भी सलाह
खरीफ मक्का में आंशिक रूप से बची फसल को बनाए रखने की सलाह दी गयी है. अधिक क्षति होने की स्थिति में पुनर्बुआई अथवा उपयुक्त रबी फसल लगाने को कहा गया है. अरहर की फसल में गैप फिलिंग, छंटाई और निकाई-गुड़ाई करते रहने की सलाह दी गयी है. साथ ही सितंबर में बोयी जाने वाली अरहर के लिए खेत तैयार करने को कहा गया है.
फूलगोभी और मिर्च की बुआई का भी समय
किसानों को फूलगोभी की मध्य अवधि वाली किस्मों की बुआई करने की सलाह दी गयी है. मिर्च की फसल के लिए ऊंची क्यारियों में बुआई करने को कहा गया है, ताकि बारिश की स्थिति में खेत में पानी जमा होने से फसल को नुकसान कम हो.
पशुओं को साफ और सूखा रखने की सलाह
पशुपालकों को पीपीआर, एफएमडी और गलघोंटू जैसे रोगों से बचाव के लिए पशुओं का समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी गयी है. पशुओं को स्वच्छ और सूखे स्थान पर रखने तथा बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने को कहा गया है.
