banka बौंसी: भारतम वाटिका के आमों ने पटना बाजार में बनायी अलग पहचान

पटना मंडी में मिले बेहतर भाव ने आसपास के किसानों को भी गुणवत्तापूर्ण बागवानी के लिए प्रेरित किया है.उन्होंने कहा कि यदि किसानों को बेहतर विपणन व्यवस्था उपलब्ध हो और उपज सीधे बड़े बाजारों तक पहुंच सके तो उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है.वाटिका के संस्थापक निमेष राय ने कहा कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलना चाहिए.

बौसी (बांका) से संजीव पाठक की रिपोर्ट उत्कृष्ट गुणवत्ता के आम को मिला 200 रुपये प्रति किलो तक का भावबौंसी. प्रखंड एवं मंदार क्षेत्र स्थित धोबियाबांध गांव की भारतम वाटिका के आमों ने इस वर्ष पटना के फल बाजार में अपनी अलग पहचान बनायी है. उत्कृष्ट गुणवत्ता और प्राकृतिक तरीके से तैयार किये गये मालदा (लंगड़ा) आम को पटना मंडी में 200 रुपये प्रति किलो तक का आकर्षक मूल्य मिला है. इससे क्षेत्र के बागवानों और किसानों में उत्साह का माहौल है.

गुणवत्ता और स्वाद ने जीता ग्राहकों का दिल

जानकारी के अनुसार, भारतम वाटिका से भेजे गये आमों की बिक्री पटना फ्रूट एंड वेजिटेबल एसोसिएशन के सहयोग से की गयी. बाजार में आम की गुणवत्ता, स्वाद और आकर्षक आकार को देखते हुए व्यापारियों और ग्राहकों ने इसे हाथोंहाथ लिया. परिणामस्वरूप आम को सामान्य बाजार दर से कहीं अधिक मूल्य प्राप्त हुआ.

जैविक तरीके से होती है आम की खेती

भारतम वाटिका में मुख्य रूप से मालदा (लंगड़ा) और जरदालू किस्म के आमों का उत्पादन किया जाता है. बागान में रासायनिक उर्वरकों के बजाय गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग कर पौधों की देखभाल की जाती है. किसानों का कहना है कि प्राकृतिक खेती पद्धति के कारण फलों की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिसका सीधा लाभ बाजार में मिलता है.

बेहतर बाजार मिलने से किसानों में बढ़ा उत्साह

वाटिका से जुड़े किसान टुनटुन सिंह और राजेश राय ने बताया कि पटना मंडी में मिले बेहतर भाव ने आसपास के किसानों को भी गुणवत्तापूर्ण बागवानी के लिए प्रेरित किया है. उन्होंने कहा कि यदि किसानों को बेहतर विपणन व्यवस्था उपलब्ध हो और उपज सीधे बड़े बाजारों तक पहुंच सके, तो उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है.

बाजार व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत

वाटिका के संस्थापक निमेष राय ने कहा कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलना चाहिए. इसके लिए बाजार व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है. उन्होंने मंडी में किसानों से लिये जाने वाले अतिरिक्त शुल्क और क्रेट वजन कटौती जैसी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ऐसी बाधाओं को दूर कर किसानों को राहत दी जानी चाहिए.खेती और बागवानी बन सकती है लाभकारी व्यवसायउन्होंने कहा कि पटना मंडी में 200 रुपये प्रति किलो का मूल्य इस बात का संकेत है कि यदि किसान गुणवत्ता पर ध्यान दें और आधुनिक विपणन तंत्र से जुड़ें, तो खेती और बागवानी को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है. भारतम वाटिका की इस उपलब्धि से बांका जिले के आम उत्पादक किसानों में नयी उम्मीद जगी है.

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Author: VINOD RAO

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