मंदार की तलहटी में 305 साल पुराना बाबा लबोखरनाथ धाम, यहां से कोई भक्त खाली नहीं लौटता

मंदार की तलहटी में स्थित बाबा लबोखरनाथ मंदिर का इतिहास 305 साल पुराना है। यहाँ सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

बांका जिले में कई प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक शिव मंदिर हैं. इन्हीं में मंदार पर्वत की तलहटी में स्थित बाबा लबोखरनाथ धाम श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है. करीब 305 वर्ष पुराने इस मंदिर में सावन के दौरान दूर-दराज से बड़ी संख्या में शिवभक्त पहुंचते हैं. हर सोमवारी के साथ पूरे श्रावण मास में डाक बम और कांवरिये बाबा का जलाभिषेक करते हैं.

300 से अधिक साल पुरानी है मंदिर की मान्यता

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के अनुसार बाबा लबोखरनाथ मंदिर का इतिहास करीब 305 वर्ष पुराना है. मान्यता है कि बाबा लबोखरनाथ के दरबार से कोई भक्त खाली नहीं लौटता. सच्चे मन से पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है.

गाय के दूध से प्रकट हुआ शिवलिंग, फिर बना मंदिर

स्थानीय मान्यता के अनुसार पुराने समय में इस क्षेत्र में कुश का घना जंगल था और आसपास का इलाका पशुओं के चारागाह के रूप में इस्तेमाल होता था. इसी दौरान गायों के झुंड में एक बाछी एक स्थान पर खड़ी होकर जोर-जोर से चिल्लाने लगी और उसके थन से अपने आप दूध निकलने लगा.

चरवाहे ने जब यह दृश्य देखा तो इसकी जानकारी गांव के लोगों को दी. बताया जाता है कि उसी वर्ष चरवाहे को सपने में उस स्थान पर शिवलिंग होने का संकेत मिला. सुबह वह वहां पहुंचा तो उसे शिवलिंग दिखाई दिया. इसके बाद यह बात आसपास के क्षेत्र में फैल गयी और ग्रामीणों के सहयोग से वहां मंदिर का निर्माण कराया गया.

सावन में कांवरियों से गुलजार रहता है धाम

श्रावण मास में बाबा लबोखरनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है. दूर-दराज से आने वाले शिवभक्त जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं. मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहता है.

पुजारी वीरेंद्र कापरी ने बताया कि बाबा लबोखरनाथ की महिमा अपरंपार है. धाम में जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालु मनवांछित फल की कामना करते हैं. सावन में बड़ी संख्या में शिवभक्त यहां पहुंचते हैं.

पुजारी प्रमोद कापरी ने बताया कि श्रावण मास में कांवरियों और शिवभक्तों के पहुंचने से धाम गुलजार रहता है. मान्यता है कि यहां जलाभिषेक के बाद मां पार्वती की पूजा करने से श्रद्धालुओं को विशेष फल की प्राप्ति होती है.

पर्यटन विभाग ने बनवाया विवाह भवन और विश्राम गृह

बाबा लबोखरनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्यटन विभाग की ओर से विवाह भवन और विश्राम गृह का निर्माण कराया गया है. सावन के अलावा महाशिवरात्रि के अवसर पर भी यहां भव्य मेले का आयोजन होता है. धार्मिक आस्था के साथ यह स्थल धीरे-धीरे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रहा है.


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लेखक के बारे में

By गौरव कश्यप

गौरव कश्यप प्रिंट माध्यम में 14 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. पंजवारा (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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