बौंसी में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा मधुश्रावणी महापर्व, नवविवाहिताएं कर रहीं शिव-गौरी की पूजा

बौंसी (बांका) में सावन मास के मधुश्रावणी महापर्व का उल्लास छाया है. नवविवाहित मैथिल ब्राह्मण महिलाएं सोलह श्रृंगार कर श्रद्धापूर्वक शिव-गौरी की पूजा-अर्चना कर रही हैं. यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि पारिवारिक संस्कारों और वैवाहिक परंपराओं को भी जीवंत करता है.

Madhushravani Festival: बौंसी (बांका). सावन मास में मनाया जाने वाला मधुश्रावणी महापर्व इन दिनों नगर एवं प्रखंड क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. यह पर्व विशेष रूप से नवविवाहित मैथिल ब्राह्मण महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. अनुष्ठान के दौरान महिलाएं पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मांग रही हैं.

दूसरे दिन सोलह श्रृंगार कर की पूजा

मंगलवार को अनुष्ठान के दूसरे दिन नवविवाहित महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा और सोलह श्रृंगार के साथ शिव-गौरी की पूजा की. फूल, अक्षत, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्रियों से विधिवत आराधना की गई. घर-आंगन में गूंजते मधुश्रावणी के लोकगीतों और मंगल धुनों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा.

धार्मिक अनुष्ठान के साथ संस्कारों का पर्व

मधुश्रावणी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पारिवारिक संस्कारों और वैवाहिक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. पूरे अनुष्ठान के दौरान नवविवाहित महिलाएं नियम, संयम और नेम-निष्ठा का पालन करती हैं. इस अवसर पर उन्हें वैवाहिक जीवन, पारिवारिक जिम्मेदारियों और लोक परंपराओं से जुड़े रीति-रिवाजों की जानकारी भी दी जाती है.

ससुराल से आती है पूजा सामग्री

पर्व के समापन अवसर पर ससुराल पक्ष के परिजन पूजा सामग्री, नए वस्त्र और पारंपरिक उपहार लेकर मायके पहुंचते हैं. इसके बाद विशेष पूजा-अर्चना और पारिवारिक विधि-विधानों के साथ मधुश्रावणी महापर्व का समापन किया जाता है.

लोक संस्कृति को जीवंत बनाए हुए है पर्व

Madhushravani Festival: स्थानीय लोगों का कहना है कि मधुश्रावणी महापर्व नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारिवारिक परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है. सावन के इस पावन अवसर पर यह पर्व आस्था, प्रेम, विश्वास और पारिवारिक मूल्यों का संदेश दे रहा है.


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लेखक के बारे में

By संजीव कुमार

संजीव कुमार पाठक प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बौंसी (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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