बांका जिले में पिछले कई दिनों से मानसून सक्रिय है. इसके कारण रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है. मौसम विभाग के अनुसार रविवार को जिले के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने के आसार हैं. वहीं, विभाग ने बांका जिले में वज्रपात और तेज हवा को लेकर येलो अलर्ट भी जारी किया है. दिनभर आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है. दक्षिण-पूर्व दिशा से 6 से 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है. जिले में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस एवं न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है. दिन के समय औसत आर्द्रता लगभग 76 से 83 प्रतिशत के बीच रह सकती है. सुबह और रात के समय यह बढ़कर 90 से 94 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.
सात सितंबर तक छाए रहेंगे घने बादल
बिहार कृषि विश्वविद्यालय ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार सात सितंबर तक बांका व भागलपुर समेत दक्षिण बिहार के अन्य जिलों में आसमान में घने बादल छाए रहने की संभावना है. इस दौरान जिले के विभिन्न स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवा और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. हवा की गति 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है. अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 80 से 85 प्रतिशत तथा दोपहर और रात में 86 से 92 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है.
आंधी के दौरान 40 किमी तक पहुंच सकती है हवा की रफ्तार
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इस अवधि में 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पुरवा हवा चल सकती है. आंधी के दौरान हवा की गति बढ़कर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. मौसम विभाग ने आम लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास नहीं रहने की सलाह दी है. ऐसे मौसम में पक्के मकान या सुरक्षित स्थान पर शरण लेने की अपील की गयी है.
किसानों को फसलों की नियमित निगरानी की सलाह
कृषि वैज्ञानिकों ने मौसम की स्थिति को देखते हुए बांका के किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है. धान की फसल में कम वर्षा की स्थिति में खरपतवार की वृद्धि हो सकती है. इसे देखते हुए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करने की सलाह दी गयी है. खरीफ मक्का में तना बेधक के प्रकोप पर नजर रखने तथा प्रभावित पौधों में लक्षण दिखाई देने पर अनुशंसित दवा का प्रयोग करने को कहा गया है. वहीं, अरहर की फसल में आवश्यकतानुसार गैप फिलिंग, छंटाई और निराई-गुड़ाई करते रहने की सलाह दी गयी है.
