लौढ़िया खुर्द में सिंचाई विभाग की लापरवाही से हजारों एकड़ खेती पर संकट: दो साल से ध्वस्त पड़ा है नहर का छिटका

बांका जिले में सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही के कारण हजारों एकड़ खरीफ की खेती पर गंभीर संकट आ गया है. राजडांढ़ नहर का मुख्य जल निकासी बिंदु पिछले दो वर्षों से पूरी तरह ध्वस्त पड़ा है, जिससे किसानों के खेत प्यासे हैं. सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता से किसानों में भारी रोष है और वे पलायन की कगार पर हैं.

बांका जिले के पंजवारा अंतर्गत लौढ़िया खुर्द पंचायत में सिंचाई विभाग की भारी लापरवाही के कारण हजारों एकड़ में होने वाली खरीफ की खेती पर गंभीर संकट मंडराने लगा है. पंचायत के राजडांढ़ नहर वितरणी पर बना मुख्य जल निकासी बिंदु (छिटका) पिछले दो वर्षों से पूरी तरह ध्वस्त पड़ा है, जिससे पानी रहते हुए भी किसानों के खेत प्यासे हैं.

खेतों तक नहीं पहुंच रहा पानी, हजारों एकड़ भूमि परती रहने की आशंका

नहर वितरणी की इस दुर्दशा के कारण क्षेत्र के किसानों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है:

  • व्यर्थ बह रहा पानी: नहर में पानी उपलब्ध होने के बावजूद, मुख्य जल निकासी बिंदु (छिटका) के क्षतिग्रस्त होने से पानी का रुख खेतों की तरफ नहीं हो पा रहा है और वह नालों में बह जा रहा है.
  • परती रह जाएगी जमीन: धान की रोपाई का समय आ चुका है. किसानों का कहना है कि यदि इसकी तुरंत मरम्मत नहीं कराई गई, तो इस सीजन में हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि बिना बुवाई के परती रह जाएगी.

सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता से किसानों में भारी रोष

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सिंचाई विभाग पर उनकी समस्याओं के प्रति पूरी तरह आंखें मूंदने का आरोप लगाया है. किसानों का कहना है कि वे अपनी इस बुनियादी समस्या को लेकर लगातार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

प्रशासन कब जागेगा, क्या हमें पलायन करना पड़ेगा: प्रभावित किसान

ध्वस्त छिटका पर प्रदर्शन के दौरान किसानों का दर्द और सिंचाई विभाग के प्रति उनका आक्रोश साफ देखने को मिला:

हम सिंचाई विभाग के कार्यालय से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के घरों तक दर्जनों चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हर बार हमें सिर्फ झूठे आश्वासन ही थमा दिए जाते हैं. पानी उपलब्ध होने के बावजूद हमारे खेत प्यासे पड़े हैं. सरकारी तंत्र की इस संवेदनहीनता के कारण गरीब किसान पूरी तरह लाचार हो चुका है. हम विभाग से दो टूक कहना चाहते हैं कि यदि तत्काल प्रभाव से इस छिटका का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू नहीं किया गया, तो हमारे पास खेती छोड़कर पलायन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा. हम इसके खिलाफ उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे.

किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खरीफ फसल को बर्बाद होने से बचाने के लिए आपातकालीन स्थिति के तहत इस पर संज्ञान लिया जाए और नहर की अविलंब मरम्मत कराई जाए.


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लेखक के बारे में

गौरव कश्यप प्रिंट माध्यम में 14 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. पंजवारा (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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