Anemia Mukt Bharat : कटोरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए विशेष पहल की जा रही है. गत 9 जुलाई को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर में आठ गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 7 से 8 ग्राम पाया गया, जो सामान्य स्तर से काफी कम था. चिकित्सकों ने उन्हें गंभीर एनीमिया की श्रेणी में चिन्हित करते हुए नि:शुल्क फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन लगाया. उपचार के बाद सभी महिलाओं की नियमित निगरानी भी की जाएगी.
एनीमिया मां और शिशु दोनों के लिए खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान खून की कमी मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है. इससे समयपूर्व प्रसव, अत्यधिक कमजोरी, प्रसव के दौरान जटिलताएं, कम वजन के शिशु का जन्म तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है. इसलिए समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी है.
एफसीएम इंजेक्शन से तेजी से बढ़ता है हीमोग्लोबिन
चिकित्सकों ने बताया कि फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (एफसीएम) आयरन की कमी को तेजी से पूरा करने वाली प्रभावी दवा है. इसका उपयोग विशेष रूप से गर्भावस्था की पहली तिमाही के बाद और प्रसव के बाद एनीमिया के उपचार में किया जाता है. सामान्यतः डेढ़ से दो माह के भीतर यह इंजेक्शन हीमोग्लोबिन स्तर में लगभग 3 से 4 ग्राम तक वृद्धि करने में सहायक हो सकता है, जिससे मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है.
नियमित जांच और संतुलित पोषण पर दें ध्यान
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने सभी गर्भवती महिलाओं से नियमित प्रसव पूर्व जांच (एएनसी), समय पर हीमोग्लोबिन जांच तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन और पोषण संबंधी दवाओं का सेवन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि एनीमिया की समय पर पहचान और समुचित उपचार से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है.
