Katoria Kali Temple : बांका जिले के कटोरिया एवं चांदन प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में स्थित प्राचीन काली मंदिरों में मंगलवार को वार्षिक गंवाली पूजा श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुई. इस दौरान जनकपुर गांव के प्रसिद्ध काली मंदिर में जीर्णोद्धार के बाद पहली बार आयोजित पूजा कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया.
जनकपुर काली मंदिर में पहली बार हुआ भव्य आयोजन
कटोरिया और चांदन प्रखंड की सीमा पर स्थित जनकपुर गांव के प्रसिद्ध काली मंदिर में जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद पहली बार गंवाली पूजा का आयोजन किया गया. सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. पारंपरिक रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां काली की विशेष पूजा-अर्चना की गई.
पूजा-अर्चना के बाद दी गई बकरों की बलि
पूजा कार्यक्रम के दौरान फूलाईश की रस्म निभाई गई और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक देवी गीतों का गायन किया. धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा संपन्न होने के बाद मां काली को बकरों की बलि भी अर्पित की गई. पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंजता रहा.
सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की मांगी दुआ
श्रद्धालुओं ने मां काली के दरबार में माथा टेककर परिवार की सुख-समृद्धि, क्षेत्र में शांति, अच्छी फसल उत्पादन, महामारी से रक्षा और अमन-चैन की कामना की. लोगों ने पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा में भाग लेकर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया.
कई गांवों के काली मंदिरों में भी हुई विशेष पूजा
जनकपुर के अलावा कटोरिया प्रखंड के बोकनमा, घघरीजोर, हिंडोलावरण, झाझा, बदासन समेत कई गांवों के प्राचीन काली मंदिरों में भी वार्षिक गंवाली पूजा का आयोजन किया गया. सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ मां काली की आराधना की और धार्मिक अनुष्ठानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
पूरे दिन भक्तिमय बना रहा माहौल
गंवाली पूजा के अवसर पर मंदिर परिसरों में दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा. महिला-पुरुष, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में पूजा में शामिल हुए. स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर वर्ष बड़ी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ इसका आयोजन किया जाता है.
