पंजवारा के ग्रामीण इलाकों में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया करमा-धर्मा पर्व

पंजवारा में करमा-धर्मा पर्व प्रकृति, भाई-बहन के प्रेम और सामुदायिक एकता का प्रतीक बनकर श्रद्धा व उल्लास से मनाया गया. पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया.

पंजवारा (बांका). पंजवारा थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों और ग्रामीण इलाकों में प्रकृति पर्व करमा-धर्मा पूरे पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाए जाने वाले इस लोक पर्व को लेकर क्षेत्र के बाजारों और गांवों में पिछले कई दिनों से उत्साह बना हुआ था. आदिवासी और स्थानीय ग्रामीण समुदायों ने प्रकृति की आराधना के साथ भाई-बहन के प्रेम और आपसी संबंधों की मजबूती का संदेश दिया.

भाइयों की लंबी उम्र के लिए बहनों ने रखा निर्जला व्रत

करमा-धर्मा पर्व को लेकर सुबह से ही युवतियों और महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला. व्रती बहनों ने अपने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर निर्जला उपवास रखा. महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पर्व की तैयारी की और शाम को सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया.

करम वृक्ष की डालियों की विधिवत पूजा

शाम के समय गांवों में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के बीच करमा-धर्मा की कथा सुनी गई. इसके बाद करम वृक्ष की डालियों को स्थापित कर विधि-विधान के साथ पूजा की गई. पूजा के दौरान प्रकृति के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए परिवार की खुशहाली और भाई-बहन के अटूट रिश्ते की कामना की गई.

लोकगीतों से गूंज उठे ग्रामीण इलाके

पूजा के दौरान पारंपरिक लोकगीत "धर्मा गाए जा, कर्मा मनाए जा..." की गूंज से ग्रामीण क्षेत्र भक्तिमय हो उठा. महिलाओं और युवतियों ने समूह में पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया और प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की. पंजवारा थाना क्षेत्र के कई गांवों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

पुलिस प्रशासन रहा मुस्तैद

त्योहार के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पंजवारा थाना पुलिस सतर्क रही. थाना क्षेत्र के संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस गश्त की गई, ताकि पर्व शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके.

थाना पुलिस के अनुसार क्षेत्र में किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और सभी स्थानों पर पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ.

खीर और पूरी का लगाया गया भोग

पूजा के समापन पर व्रतियों ने करम देवता को खीर और पूरी का भोग लगाया. इसके बाद रातभर जागकर लोक कथाओं और पारंपरिक गीतों के माध्यम से पर्व का आनंद लिया गया.

पर्व की परंपरा के अनुसार सुबह करम की डालियों का विधि-विधान के साथ विसर्जन किया जाएगा.

प्रकृति संरक्षण और भाई-बहन के प्रेम का संदेश

करमा-धर्मा पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक एकता और भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है. पर्व के माध्यम से ग्रामीण समुदायों ने परंपरा, लोक संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की भावना को आगे बढ़ाया.

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लेखक के बारे में

By गौरव कश्यप

गौरव कश्यप प्रिंट माध्यम में 14 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. पंजवारा (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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