श्रावणी मेला में सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम से बाबाधाम तक की कांवर यात्रा के दौरान आस्था, श्रद्धा और पारिवारिक प्रेम की अनूठी तस्वीरें सामने आ रही हैं. कांवरिया पथ पर झारखंड के गिरिडीह निवासी एक श्रद्धालु दंपती की यात्रा लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. दंपती अपने कंधों पर कांवर लेकर पैदल चल रहे हैं, वहीं उनका मासूम पुत्र बेबी ट्रॉली में साथ यात्रा कर रहा है. पूरा परिवार करीब 105 किलोमीटर की दूरी तय कर बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है.
कंधे पर कांवर और साथ में मासूम बेटा
श्रद्धालु दंपती अजगैबीनाथ धाम से कांवर लेकर बाबाधाम की ओर पैदल बढ़ रहे हैं. उनके साथ उनका मासूम पुत्र भी है, जिसे बेबी ट्रॉली में लेकर वे यात्रा कर रहे हैं. कांवरिया पथ पर जब भी यह परिवार आगे बढ़ता दिखाई देता है, आसपास मौजूद श्रद्धालुओं की नजर कुछ देर के लिए ठहर जाती है. माता-पिता की भक्ति के साथ बेटे के प्रति उनका प्रेम भी लोगों को आकर्षित कर रहा है.
दंपती ने बताया- महादेव की कृपा से मिला पुत्र
दंपती ने बताया कि भगवान महादेव की कृपा से ही उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है. बेटे के जन्म को वे भोलेनाथ का आशीर्वाद मानते हैं. इसी आस्था और कृतज्ञता के भाव से दोनों अपने मासूम बेटे को साथ लेकर कांवर यात्रा पर निकले हैं. उनका कहना है कि जिस महादेव की कृपा से परिवार को यह खुशी मिली, अब उन्हीं के दरबार में पहुंचकर यात्रा पूरी करना उनके लिए बेहद खास है.
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105 किलोमीटर की यात्रा में परिवार का साथ
अजगैबीनाथ धाम से बाबाधाम तक करीब 105 किलोमीटर की कांवर यात्रा आसान नहीं होती. इसके बावजूद दंपति अपने छोटे बच्चे को साथ लेकर लगातार पैदल आगे बढ़ रहे हैं. रास्ते में विश्राम के दौरान बच्चे की देखभाल करते हुए दोनों फिर यात्रा शुरू कर देते हैं. कांवरिया पथ पर परिवार का यह समर्पण अन्य श्रद्धालुओं के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है.
आस्था और पारिवारिक प्रेम की अनूठी तस्वीर
इस परिवार को देखकर दूसरे कांवरिये भी भावुक नजर आ रहे हैं. किसी के लिए यह महादेव के प्रति श्रद्धा का उदाहरण है तो किसी के लिए माता-पिता के अपने बच्चे के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की तस्वीर. कांवरिया पथ पर हर दिन सामने आने वाली अलग-अलग आस्था की कहानियों के बीच इस दंपति की यात्रा भी श्रावणी मेले की यादगार तस्वीरों में शामिल हो गई है.
भोलेनाथ के दरबार में पूरी होगी यात्रा
दंपति का कहना है कि यह यात्रा उनके लिए सिर्फ कांवर लेकर बाबाधाम जाने का सफर नहीं, बल्कि महादेव के प्रति धन्यवाद और विश्वास की यात्रा है. बेटे को साथ लेकर वे बाबा के दरबार तक पहुंचना चाहते हैं. उनका विश्वास है कि भोलेनाथ की कृपा से उनकी कांवर यात्रा सकुशल पूरी होगी और बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद उनकी श्रद्धा और भी मजबूत होगी.
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