Canal Crisis : पंजवारा के लौढ़िया खुर्द पंचायत स्थित राजडांढ़ नहर वितरणी पर बना छिटका (मुख्य जल निकासी बिंदु) पिछले दो वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ा है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सिंचाई विभाग की उदासीनता के कारण यह महत्वपूर्ण जल संरचना पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. अब इसका सीधा असर खरीफ खेती पर पड़ने लगा है और किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है.
खेतों तक नहीं पहुंच रहा सिंचाई का पानी
खरीफ सीजन शुरू होने के साथ धान की रोपाई के लिए खेतों में पानी की जरूरत है, लेकिन टूटा हुआ छिटका किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. छिटका क्षतिग्रस्त होने के कारण नहर का पानी खेतों तक पहुंचने के बजाय नालों में बहकर बर्बाद हो रहा है. इससे हजारों एकड़ कृषि भूमि के परती रहने की आशंका जताई जा रही है.
किसानों ने बयां किया अपना दर्द
प्रभावित किसानों का कहना है कि वे कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से छिटका की मरम्मत कराने की मांग कर चुके हैं. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई. किसानों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं, जबकि खेती और परिवार की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है.
प्रदर्शन कर विभाग के खिलाफ जताया आक्रोश
समस्या से नाराज किसानों ने ध्वस्त छिटका स्थल पर एकत्रित होकर सिंचाई विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की. किसानों ने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र की लापरवाही का खामियाजा गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है. उनका कहना है कि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो खेती पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी.
आंदोलन की चेतावनी, जल्द निर्माण की मांग
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि सिंचाई विभाग ने तत्काल प्रभाव से छिटका निर्माण और मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर शुरू नहीं किया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे. किसानों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर सिंचाई व्यवस्था बहाल करने और खरीफ फसल को बचाने की मांग की है.
