कौआवरण में बंद पड़ा सामुदायिक शौचालय, पानी के अभाव में खुले में शौच को मजबूर

Banka News : सरकार ने गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर छह सीट वाला सामुदायिक शौचालय बनवाया, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं होने से यह अब सिर्फ “शोपीस” बनकर रह गया है.

बौसी(बांका) से संजीव पाठक की रिपोर्ट : बौसी प्रखंड क्षेत्र के कौआवरण गांव में स्वच्छता योजना की बदहाल तस्वीर सामने आयी है. वार्ड संख्या एक में सड़क किनारे बनाया गया सामुदायिक शौचालय उपयोग के बजाय जर्जर होने की कगार पर पहुंच गया है. पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीण आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं.

छह सीट वाला शौचालय नहीं आया काम

जानकारी के अनुसार लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत वर्ष 2020-21 में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा करीब 1.80 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था.शौचालय में कुल छह सीटें बनायी गयीं, जिनमें दो पुरुषों और चार महिलाओं के लिए निर्धारित हैं. निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद इसे नियमित रूप से चालू नहीं किया जा सका.

पानी नहीं, इसलिए बेकार पड़ा शौचालय

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के समय पानी की स्थायी व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया. इसी वजह से शुरुआत से ही शौचालय का उपयोग नहीं हो पाया.अब हालत यह है कि शौचालय के दरवाजों में जंग लगने लगी है और भवन धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है. रखरखाव के अभाव में परिसर में गंदगी भी फैलने लगी है.

स्वच्छता योजना पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाना था, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण योजना धरातल पर विफल साबित हो रही है.लोगों का कहना है कि यदि पानी और रखरखाव की व्यवस्था होती तो गांव के लोगों को इसका लाभ मिल सकता था.

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से सामुदायिक शौचालय में पानी की सुविधा बहाल करने और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग की है.लोगों का कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी स्वच्छता योजना तभी सफल होगी, जब बनी हुई सुविधाओं को सही तरीके से चालू रखा जाए.

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Published by: Amit kumar sinh

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