बौसी, बांका से संजीव पाठक की रिपोर्ट : बिहार नगर पालिका संशोधन अधिनियम 2026 के तहत नगर निकायों में सशक्त स्थायी समिति के गठन की नई व्यवस्था लागू की गई है. इस प्रावधान को लेकर अब विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं. बांका जिले के बौंसी नगर पंचायत की अध्यक्ष Komal Bharti ने कहा कि नगर अध्यक्ष को अपनी कार्यशैली और प्राथमिकताओं के अनुरूप टीम के साथ काम करने का अधिकार मिलना चाहिए.
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री मॉडल का दिया उदाहरण
नगर अध्यक्ष ने कहा कि जिस प्रकार राज्य और देश में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री अपनी योजनाओं और प्राथमिकताओं के अनुसार मंत्रिमंडल का गठन करते हैं, उसी तरह नगर निकायों में भी अध्यक्ष की भूमिका सशक्त स्थायी समिति के गठन में प्रभावी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल चुनावी आधार पर समिति बनने से प्रशासनिक समन्वय प्रभावित हो सकता है.
नगर विकास की योजनाओं पर पड़ सकता है असर
कोमल भारती ने कहा कि सशक्त स्थायी समिति नगर निकायों की कैबिनेट की तरह काम करती है. इसी समिति में सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, सड़क-नाला निर्माण, स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास योजनाओं से जुड़े अहम फैसले लिए जाते हैं. ऐसे में यदि समिति में राजनीतिक विरोध के आधार पर सदस्य चुन लिए जाएंगे, तो विकास कार्यों में बाधा आ सकती है.विरोधी गुट हावी होने की जताई आशंका
उन्होंने आशंका जताई कि यदि समिति में विरोधी गुट के सदस्य अधिक संख्या में पहुंच जाते हैं, तो योजनाओं को जानबूझकर लंबित रखा जा सकता है. बैठकों में विवाद और गतिरोध की स्थिति बनने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होगी और इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा.
जनता की सुविधाएं प्रभावित होने का दावा
नगर अध्यक्ष ने कहा कि नगर निकायों का मुख्य उद्देश्य शहर और कस्बों का विकास तथा नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाना है, न कि राजनीतिक खींचतान. यदि समिति के भीतर लगातार टकराव बना रहा तो सड़क, नाला, सफाई और पेयजल जैसी जरूरी योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाएंगी.सरकार से पुनर्विचार की मांग
कोमल भारती ने बिहार सरकार से मांग करते हुए कहा कि जनहित और प्रशासनिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए इस प्रावधान पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे नगर निकायों में विकास कार्य बिना बाधा के संचालित हो सकें और जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
