2 एकड़ जमीन से 13 लाख की कमाई, मधुमक्खी पालन व सूरजमुखी खेती ने बदल दी सुलेखा की जिंदगी

Bee Farming Success story : कभी सीमित खेती से परिवार चलाना मुश्किल था, लेकिन आज बांका की एक महिला किसान मधुमक्खी पालन और सूरजमुखी की खेती से लाखों रुपये की आय अर्जित कर रही हैं और सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं.

मुख्य बातें

धोरैया (बांका) से प्रदीप कुमार की रिपोर्ट

Bee Farming Success story : धोरैया प्रखंड की मकैता बबुरा पंचायत के धनकुंड गांव की प्रगतिशील महिला किसान सुलेखा कुमारी ने मेहनत, प्रशिक्षण और नवाचार के दम पर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है. मधुमक्खी पालन और सूरजमुखी की खेती को अपनाकर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं.

दो एकड़ जमीन से शुरू हुई सफलता की कहानी

सुलेखा कुमारी के पास केवल दो एकड़ जमीन थी. पारंपरिक खेती से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था. इसी बीच वर्ष 2023 में कृषि एवं उद्यान विभाग की ओर से आयोजित मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के बाद उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया.

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें 75 प्रतिशत अनुदान पर 20 मधुमक्खी बक्से उपलब्ध कराए गए, जिससे उनके नए सफर की शुरुआत हुई.

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Bee Farming Success story : चुनौतियों के बीच नहीं मानी हार

शुरुआती दौर में मौसम की मार और मधुमक्खियों में होने वाली बीमारियों जैसी कई चुनौतियां सामने आईं. हालांकि कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और लगातार प्रयासों से उन्होंने इन समस्याओं का समाधान निकाला.

उन्होंने विभिन्न फसलों के पास मधुमक्खी बक्से स्थापित किए, जिससे मधुमक्खियों को पर्याप्त भोजन मिला और फसलों में परागण भी बेहतर हुआ. इसका सकारात्मक असर शहद उत्पादन और कृषि उपज दोनों पर पड़ा.

तीन साल में 135 किलो से 4200 किलो तक पहुंचा उत्पादन

वर्ष 2023-24 में 20 बक्सों से 135 किलोग्राम शहद का उत्पादन हुआ. इसके बाद वर्ष 2024-25 में बक्सों की संख्या बढ़ाकर 80 कर दी गई, जिससे 750 किलोग्राम शहद प्राप्त हुआ.

वहीं वर्ष 2025-26 में उन्होंने 200 मधुमक्खी बक्सों के माध्यम से करीब 4200 किलोग्राम शहद का उत्पादन किया, जिसने उनकी आय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया.

शहद बेचकर कमाए 12 से 13 लाख रुपये

करीब 300 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से शहद की बिक्री कर सुलेखा कुमारी ने 12 से 13 लाख रुपये की आय अर्जित की. सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्हें लगभग 5 से 6 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ.

इसके अलावा मधुमक्खी मोम और अन्य उत्पादों की बिक्री से भी उन्हें अतिरिक्त आय हो रही है. वह नए मधुमक्खी पालकों को बक्से उपलब्ध कराकर रोजगार का एक नया माध्यम भी विकसित कर रही हैं.

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सूरजमुखी की खेती बनी मधुमक्खियों का सहारा

इस वर्ष भीषण गर्मी के दौरान मधुमक्खियों के लिए भोजन की कमी की समस्या सामने आई. ऐसे में कृषि विभाग के सहयोग से उन्होंने सूरजमुखी की खेती शुरू की.

सूरजमुखी के फूलों से मधुमक्खियों को पर्याप्त पराग और रस मिल रहा है, जिससे शहद उत्पादन लगातार जारी है. साथ ही सूरजमुखी की फसल से उन्हें अतिरिक्त कृषि आय भी प्राप्त हो रही है.

सम्मान के साथ बनीं प्रेरणा की मिसाल

उत्कृष्ट कार्यों के लिए सुलेखा कुमारी को जिला स्तर पर प्रगतिशील किसान सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है. उनकी सफलता की कहानी आज धोरैया ही नहीं, बल्कि पूरे बांका जिले और बिहार में मधुमक्खी पालन को नई पहचान दिला रही है.

उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि सही प्रशिक्षण, सरकारी सहयोग और मजबूत इरादों के साथ ग्रामीण महिलाएं भी कृषि और उद्यमिता के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकती हैं.

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Published by: Amit kumar sinh

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