Banka News: अंग क्षेत्र की लोक आस्था, परंपरा और संस्कृति से जुड़ी बिहुला-विषहरी पूजा मंगलवार को श्रद्धा और भावुकता के माहौल में संपन्न हो गयी. बौंसी नगर पंचायत क्षेत्र के डेम रोड स्थित दलिया गांव के वार्ड 17 एवं 18 में तीन दिनों से चल रहे पूजा उत्सव के अंतिम दिन धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कुंवारी कन्याओं को भोग कराया गया. इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.
सुबह से ही पूजा स्थल पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गयी थी. गांव की गलियों से लेकर विषहरी स्थान तक भक्ति का माहौल बना रहा. पारंपरिक लोकगीतों और पूजा-पाठ के बीच लोगों ने मां विषहरी से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की.
कुंवारी कन्याओं को कराया गया भोग, बांटा गया प्रसाद
पूजा के अंतिम दिन परंपरा के अनुसार कुंवारी कन्याओं को भोग कराया गया. श्रद्धालुओं ने धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और इसके बाद प्रसाद का वितरण किया.
अंतिम दिन बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों के अलावा आसपास के गांवों से भी लोग दलिया पहुंचे. श्रद्धालुओं ने मां विषहरी के दरबार में माथा टेककर अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना की.
स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन केवल पूजा तक सीमित नहीं है. तीन दिनों तक चलने वाला यह उत्सव गांव के लोगों को एक साथ जोड़ने का भी अवसर देता है.
लोकगीतों से गूंजता रहा पूजा स्थल
विषहरी पूजा के दौरान अंग क्षेत्र की पारंपरिक लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली. पूजा स्थल पर लोकगीतों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालु भक्ति में डूबे रहे.
अंग क्षेत्र में बिहुला-विषहरी पूजा को सदियों पुरानी लोक आस्था से जोड़कर देखा जाता है. यही वजह है कि आधुनिक दौर में भी ग्रामीण इलाकों में इस परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जाता है.
पूजा के दौरान ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
शाम होते ही निकली विसर्जन यात्रा
शाम होते ही मां विषहरी की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने की तैयारी शुरू हुई. इसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ प्रतिमा की विसर्जन यात्रा निकाली गयी.
श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच निकली यात्रा में भक्ति के साथ भावुकता का भी माहौल था. तीन दिनों तक पूजा स्थल पर मां की आराधना करने के बाद श्रद्धालुओं ने नम आंखों से विदाई दी.
विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमा का जल में विसर्जन किया गया. इसके साथ ही दलिया गांव में आयोजित तीन दिवसीय बिहुला-विषहरी पूजा उत्सव का समापन हो गया.
दलिया का विषहरी स्थान आस्था का बड़ा केंद्र
स्थानीय पंडित दिनेश भगत ने बताया कि दलिया गांव का विषहरी स्थान लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है. लोगों की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गयी मनोकामना पूरी होती है.
मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु परंपरा के अनुसार फुलाइस की रस्म भी निभाते हैं. यही मान्यता इस पूजा को स्थानीय लोगों के बीच और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है.
Banka News: पूजा से जुड़ी है अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान
बिहुला-विषहरी पूजा अंग क्षेत्र की धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां की लोक संस्कृति की पहचान भी है. पूजा के दौरान निभायी जाने वाली परंपराएं, लोकगीत, सामूहिक आयोजन और विसर्जन यात्रा नई पीढ़ी को क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम करते हैं.
दलिया गांव में भी ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से हर वर्ष पूजा का आयोजन किया जाता है. मंगलवार को मां विषहरी की विदाई के साथ भले ही तीन दिवसीय उत्सव समाप्त हो गया, लेकिन गांव की गलियों में इसकी भक्ति और लोक परंपरा की छाप लंबे समय तक बनी रहेगी.
Also Read: अक्टूबर से फिर बिहार के लोगों के बीच जाएंगे नीतीश कुमार? संजय झा से मुलाकात के बाद बढ़ी सियासी हलचल
Also Read: पटना नगर निगम ने अपने ही मेयर को थमाया नोटिस, 26 हजार आवासीय संपत्तियों पर सीलिंग का खतरा
