बाराहाट प्रखंड में पशुपालकों को पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने वाली सरकारी व्यवस्था खुद ही बीमार नजर आ रही है. पशु अस्पतालों में चिकित्सकों के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने की शिकायत लगातार सामने आ रही है. स्थिति यह है कि सुबह-सुबह बीमार मवेशियों को लेकर अस्पताल पहुंचने वाले पशुपालकों को घंटों चिकित्सक का इंतजार करना पड़ रहा है. इलाज नहीं मिलने पर कई लोग अपने मवेशियों को लेकर वापस लौटने को मजबूर हैं.
सुबह नौ बजे तक चिकित्सक का इंतजार
बुधवार को बाराहाट पशु अस्पताल में सुबह नौ बजे तक कई पशुपालक अपने बीमार मवेशियों को लेकर चिकित्सक का इंतजार करते नजर आये. अस्पताल परिसर में परिचारिका मौजूद थीं, लेकिन चिकित्सक अपने कक्ष में नहीं थे. परिचारिका ने बताया कि चिकित्सक को सूचना दे दी गयी है और उनके पहुंचने की उम्मीद है.
इसके बाद पशुपालकों ने दूरभाष पर चिकित्सक मुकेश कुमार से संपर्क किया. चिकित्सक ने करीब दस मिनट में अस्पताल पहुंचने की बात कही. लेकिन करीब 9:30 बजे तक भी उनके नहीं पहुंचने पर इंतजार कर रहे पशुपालक परेशान होकर अपने बीमार मवेशियों को लेकर लौट गये.
अस्पताल परिसर में आवास, फिर भी समय पर नहीं पहुंचने का आरोप
पशुपालकों का आरोप है कि यह स्थिति किसी एक दिन की नहीं है. उनका कहना है कि अस्पताल परिसर में ही चिकित्सक का आवास होने के बावजूद निर्धारित समय पर अस्पताल नहीं पहुंचना गंभीर लापरवाही है.
खेती-किसानी के व्यस्त मौसम में पशुओं में बीमारी और संक्रमण की शिकायतें बढ़ रही हैं. ऐसे समय पर सरकारी अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिलने से पशुपालकों की परेशानी बढ़ रही है. बीमार मवेशियों की हालत बिगड़ने पर उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.
पंजवारा में 9 बजे तक अस्पताल पर लटका रहा ताला
बाराहाट के पंजवारा पशु चिकित्सालय की स्थिति भी इससे अलग नहीं मिली. बुधवार को सुबह नौ बजे तक अस्पताल का मुख्य द्वार बंद था और ताला लटका हुआ था. वहां तैनात पशु चिकित्सक निशा कुमारी भी निर्धारित समय तक अस्पताल नहीं पहुंची थीं.
दूर-दराज से अपने बीमार पशुओं को लेकर अस्पताल पहुंचे लोगों को चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल सकी. इससे उन्हें निराश होकर लौटने की नौबत बन गयी.
विभाग ने कहा-होगी कार्रवाई
मामले में जिला पशुपालन पदाधिकारी राजीव रंजन ने कहा कि सभी पशु चिकित्सकों को निर्धारित समय पर पशु चिकित्सालय पहुंचने का सख्त निर्देश दिया गया है. इसके बावजूद यदि किसी चिकित्सक के समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने की शिकायत मिलती है तो संबंधित चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा.
उन्होंने कहा कि स्पष्टीकरण का जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र के पशुपालकों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.
पशुपालकों के सामने तीन बड़ी परेशानियां
सरकारी पशु अस्पतालों की अनियमितता के कारण पशुपालकों को सुबह से अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक का इंतजार करना पड़ रहा है. बीमार मवेशियों को समय पर इलाज नहीं मिलने से उनकी हालत बिगड़ने का जोखिम बना रहता है. वहीं सरकारी व्यवस्था से निराश होने पर पशुपालकों को निजी स्तर पर इलाज कराना पड़ सकता है, जिससे उनके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है.
