विक्रमशिला सेतु संकट और बढ़े ट्रांसपोर्ट खर्च का असर, बांका मंडी में खाद्यान्न के दाम बढ़ने के संकेत

Banka Mandi Rate : बांका मंडी में मंगलवार को अनाज, दलहन और तेलहन की आवक मिली-जुली रही, पर बढ़ी ढुलाई लागत और विक्रमशिला सेतु पर आवागमन प्रभावित होने से कीमतें बढ़ने की आशंका है। मौसम और आवक पर किसानों व व्यापारियों की नजर टिकी है।

Banka Mandi Rate : बांका की व्यावसायिक मंडी में मंगलवार को अनाज, दलहन और तेलहन की आवक अन्य दिनों की तुलना में मिली-जुली रही, जिससे अधिकांश खाद्यान्न के दाम स्थिर बने रहे. वहीं शहर की सब्जी मंडी में आलू और प्याज की कीमतों में रोजाना की तरह मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला. व्यापारियों के अनुसार फिलहाल बाजार शांत है, लेकिन मौसम और आवक में बदलाव के साथ कीमतों में तेजी आ सकती है.

विक्रमशिला सेतु और ईंधन महंगा, बढ़ी ढुलाई लागत

व्यापारियों का कहना है कि भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर आवागमन प्रभावित होने और ईंधन की कीमतों में वृद्धि से माल ढुलाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है. लंबी दूरी तय कर आने वाले ट्रकों का किराया बढ़ने से थोक व्यापारियों से लेकर खुदरा दुकानदारों तक पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. यही वजह है कि कई खाद्यान्न और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के संकेत मिलने लगे हैं.

किसानों और कारोबारियों की नजर मौसम पर

मानसून के दौरान मंडी में आने वाली फसलों की मात्रा मौसम पर निर्भर करती है. व्यापारियों का मानना है कि यदि बारिश सामान्य रही और आवक बेहतर हुई तो कुछ जिंसों के दाम स्थिर रह सकते हैं. वहीं आवक घटने या परिवहन में परेशानी बढ़ने पर कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है. किसान भी बाजार के रुख और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.

आज बांका मंडी के प्रमुख भाव (प्रति क्विंटल)

गेहूं 2600 से 2650 रुपये, मक्का 2100 से 2150 रुपये, मंसूरी चावल 3250 से 3400 रुपये, अरवा मोटा चावल 3100 से 3250 रुपये, बासमती चावल 12500 से 13500 रुपये, मसूर दाल 6000 से 6550 रुपये, मूंग दाल 9540 से 9600 रुपये, अरहर दाल 11500 से 15000 रुपये, गोटा चना 6200 से 6400 रुपये, गोटा मूंग 8500 से 9000 रुपये, पीला सरसों 7300 से 7550 रुपये, 15 लीटर सरसों तेल 2070 से 2470 रुपये, आलू 1200 से 1450 रुपये तथा प्याज 3800 से 3900 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया.

आने वाले दिनों में बढ़ सकते हैं दाम

मंडी कारोबारियों का मानना है कि यदि ट्रांसपोर्टिंग लागत इसी तरह बढ़ती रही और आवक प्रभावित हुई तो खाद्यान्न, दलहन, तेलहन और सब्जियों की कीमतों में और तेजी आ सकती है. ऐसे में किसानों और व्यापारियों दोनों की नजर अब मौसम, परिवहन व्यवस्था और बाजार की मांग पर टिकी हुई है.


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लेखक के बारे में

By मदन कुमार

मदन कुमार प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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