Banka News:प्रस्तावित परमाणु विद्युत संयंत्र के विरोध में ग्रामीणों का छठे दिन भी प्रदर्शन, ‘जमीन नहीं देंगे’ के नारों से गूंजा रघुनाथपुर

Banka News: बेलहर प्रखंड के रघुनाथपुर पंचायत में प्रस्तावित परमाणु विद्युत पावर प्लांट के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन तेज। छठे दिन भी ग्रामीणों ने गांव-गांव जुलूस निकालकर संयंत्र निर्माण का विरोध किया और किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ने की चेतावनी दी।

बेलहर बांका से अभय कुमार ‘सोनू’ की रिपोर्ट

Banka News:बांका जिले के बेलहर प्रखंड अंतर्गत रघुनाथपुर पंचायत में प्रस्तावित परमाणु विद्युत संयंत्र निर्माण के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन छठे दिन भी जारी रहा. भाकपा (माले) के जिलाध्यक्ष रणवीर कुशवाहा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने गांव-गांव घूमकर विरोध जुलूस निकाला और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

बेलहर प्रखंड के रघुनाथपुर पंचायत में प्रस्तावित परमाणु विद्युत पावर प्लांट निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन लगातार छठे दिन भी जारी रहा. आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे भाकपा (माले) के जिलाध्यक्ष रणवीर कुशवाहा ने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना और उनके साथ गांव-गांव घूमकर विरोध जुलूस में शामिल हुए.

कटरा मोड़ से लेटवा तक प्रदर्शन


इस दौरान देवघर-सुल्तानगंज मुख्य मार्ग पर जिलेबिया मोड़ थाना क्षेत्र के कटरा मोड़ से लेटवा तक ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया. जुलूस के दौरान ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘रघुनाथपुर आदिवासी बहुल क्षेत्र जिंदाबाद’, ‘जेल-मौत से नहीं डरेंगे, रघुनाथपुर से नहीं हटेंगे’, ‘जोर-जुल्म के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है’ और ‘पावर प्लांट वापस जाओ’ जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा.

मिट्टी जांच के लिए पहुंची टीम को भी ग्रामीणों ने रोका


जानकारी के अनुसार, रघुनाथपुर मौजा के लेटवा, कटहरा, दुबराज, केन्दुआ-झरना, मलटरिया और नीमटाड़ गांवों की करीब 1400 एकड़ भूमि पर औद्योगिक विकास के तहत परमाणु विद्युत संरचना निर्माण की संभावना को लेकर जांच प्रक्रिया चल रही है. पांच दिन पूर्व मिट्टी जांच के लिए पहुंची टीम को भी ग्रामीणों ने गांव में प्रवेश करने से रोक दिया था. इसके बाद से लगातार धरना और विरोध प्रदर्शन जारी है. ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर संयंत्र लगाने की योजना बनाई जा रही है, वहां उनके पूर्वजों के समय से वे लोग रह रहे हैं. इसी जमीन पर खेती-बाड़ी कर उनका परिवार चलता है और जंगल-जमीन ही उनके जीवनयापन का मुख्य आधार है. ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी जमीन अधिग्रहित की गई तो उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें किसी कीमत पर फैक्ट्री नहीं चाहिए, बल्कि अपनी पुश्तैनी जमीन और जंगल की सुरक्षा चाहिए.

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By Ajeet kumar

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