बांका मंडी में विक्रमशिला सेतु टूटने के बाद महंगाई की मार, खाद्यान्न से मसाले तक सब महंगे

Banka Mandi News: बांका मंडी में ट्रांसपोर्टिंग खर्च और बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अब साफ दिखने लगा है. विक्रमशिला सेतु ध्वस्त होने के बाद खाद्यान्न, मसाला और तेलहन के दामों में लगातार उछाल दर्ज किया जा रहा है.

Banka Mandi News: बांका. जिले की मंडियों में इन दिनों महंगाई का असर लगातार गहराता जा रहा है. भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु के ध्वस्त होने के बाद पूर्णिया और आसपास की मंडियों से आने वाले माल की ढुलाई महंगी हो गयी है. लंबी दूरी तय कर ट्रकों के बांका पहुंचने से ट्रांसपोर्टिंग लागत बढ़ गयी है, जिसका सीधा असर खाद्यान्न, दलहन, तेलहन और मसालों की कीमतों पर पड़ रहा है. स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में बाजार और महंगा हो सकता है.

100 किलोमीटर की जगह अब 250 किलोमीटर का सफर

व्यापारियों के अनुसार पहले पूर्णिया से भागलपुर होकर बांका तक माल पहुंचाने में कम दूरी तय करनी पड़ती थी. लेकिन विक्रमशिला सेतु ध्वस्त होने के बाद अब ट्रकों को मुंगेर के कृष्णा सेतु होकर करीब 250 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है. इससे डीजल और पेट्रोल की खपत बढ़ी है और माल ढुलाई महंगी हो गयी है.

खाद्यान्न से मसाले तक हर चीज पर असर

स्थानीय मंडी में गेहूं, चावल, दाल, सरसों और मसालों के दाम में लगातार तेजी देखी जा रही है. व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच चुका है. खासकर दलहन, तेलहन और मसाले की कीमतों में ज्यादा उछाल देखने को मिल रहा है.

आज का मंडी भाव

शनिवार को बांका मंडी में गेहूं 2600 से 2650 रुपये प्रति क्विंटल और मक्का 2100 से 2150 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिका. मंसूरी चावल 3250 से 3400 रुपये और बासमती चावल 12500 से 13500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया.

दाल बाजार में मसूर दाल 5550 से 6750 रुपये, मूंग दाल 9540 से 9600 रुपये और अरहर दाल 11000 से 14500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रही. वहीं पीला सरसों 7300 से 7550 रुपये और 15 लीटर सरसों तेल 2070 से 2470 रुपये तक बिक रहा है.

आम उपभोक्ताओं पर बढ़ रहा दबाव

मंडी कारोबारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्टिंग खर्च और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने बाजार को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है. आलू और प्याज जैसे रोजमर्रा के सामानों में भी तेजी बनी हुई है. आम लोग अब हर खरीदारी में महंगाई का असर महसूस कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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