बांका से मदन कुमार की रिपोर्ट
Banka Mandi: अंग और सीमांचल प्रक्षेत्र की मुख्य व्यावसायिक मंडियों में से एक बांका अनाज मंडी से मंगलवार को खाद्यान्न और रोजमर्रा की सामग्रियों के मिले-जुले व्यापारिक संकेत सामने आए हैं. मंडी में खाद्यान्न, दलहन और तेलहन की आवक सामान्य रहने से थोक बाजार का भाव फिलहाल संतुलित स्थिति में संधारित है. इसके बावजूद, खुदरा बाजार में बढ़ती महंगाई दर ने आम नागरिकों और मध्यम वर्गीय परिवारों का जीना मुहाल कर दिया है. स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, थोक स्तर पर कीमतें स्थिर होने के बाद भी खुदरा क्षेत्र में जो तेजी है, उसकी मुख्य वजह भागलपुर के ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु का ध्वस्त होना और ईंधन (डीजल-पेट्रोल) की दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी है.
माल ढुलाई का बढ़ा भाड़ा; लंबी दूरी तय कर पहुंच रहे हैं व्यावसायिक वाहन
- लॉजिस्टिक नेटवर्क ध्वस्त: विक्रमशिला सेतु के टूटने के कारण भारी और व्यावसायिक वाहनों को अब एक लंबा वैकल्पिक रूट तय करके बांका और भागलपुर प्रक्षेत्र में प्रवेश करना पड़ रहा है.
- दोगुनी हुई ट्रांसपोर्टिंग लागत: लंबी दूरी और ईंधन के ऊंचे दामों की वजह से थोक विक्रेताओं से लेकर कनिष्ठ-वरिष्ठ खुदरा व्यापारियों तक को माल ढुलाई के लिए अतिरिक्त भाड़ा चुकाना पड़ रहा है. ट्रांसपोर्टरों द्वारा बढ़ाया गया यह खर्च अंततः खुदरा उपभोक्ताओं और खेती-किसानी से जुड़े उपकरणों की कड़ियों पर ट्रांसफर हो रहा है, जिससे खुदरा महंगाई चरम पर है.
बांका मंडी का ताजा बाजार भाव: देखें पूरी लिस्ट
शहर के मुख्य व्यावसायिक कप्तानों (थोक आढ़तियों) के अनुसार, मंगलवार को विभिन्न खाद्यान्न, तेल और हरी सब्जियों के जो आधिकारिक दाम (प्रति क्विंटल की दर से) संधारित किए गए, वे इस प्रकार हैं:
| अनाज / खाद्यान्न का नाम | न्यूनतम मूल्य (₹) | उच्चतम मूल्य (₹) |
| गेहूं (Wheat) | 2600 | 2650 |
| मक्का (Maize) | 2100 | 2150 |
| चावल बासमती | 12500 | 13500 |
| चावल मंसूरी / चावल अरवा मोटा | 3250 / 3100 | 3400 / 3250 |
| दाल अरहर | 11500 | 15000 |
| दाल मूंग / दाल मसूर | 9540 / 6000 | 9600 / 6550 |
| गोटा मूंग / गोटा चना | 8500 / 6200 | 9000 / 6400 |
| पीला सरसों | 7300 | 7550 |
| सरसों तेल (प्रति 15 लीटर टीन) | 2070 | 2470 |
| प्याज (Per Quintal) | 1800 | 1900 |
| आलू (Per Quintal) | 1200 | 1450 |
आलू-प्याज के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव; आगामी दिनों में और तेजी के संकेत
“मंडी में दलहन, तेलहन और मसालों की थोक कीमतें फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन आलू और प्याज के दाम स्थानीय आवक की कमी के कारण हर रोज नया रुख अख्तियार कर रहे हैं. यदि विक्रमशिला सेतु के रूट का कोई सुगम और तात्कालिक प्रशासनिक विकल्प नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में मांग बढ़ने पर खाद्यान्न कड़ियों की थोक कीमतों में भी भारी उछाल आ सकता है.”
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मानसून के पैर पसारने के साथ ही ग्रामीण इलाकों से मंडी तक माल पहुंचाने की कड़ियां और अधिक प्रभावित हो सकती हैं. ऐसे में खुदरा जमाखोरी और कृत्रिम किल्लत को रोकने के लिए जिला प्रशासन और विपणन पदाधिकारियों को बाजार की सघन मॉनिटरिंग संधारित करनी होगी, ताकि कली-मजदूरों और आम जनता को खुदरा महंगाई की दोहरी मार से सुरक्षित रखा जा सके.
