बांका में ‘हर घर तिरंगा’ से बदली ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर, 55 हजार तिरंगे बनाएंगी 200 जीविका दीदियां

‘हर घर तिरंगा’ अभियान बांका जिले की ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगा रहा है. राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ महिलाएं रोजगार के नए अवसर हासिल कर रही हैं और अपने हुनर से तिरंगे बनाकर सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं.

‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने बांका जिले की ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगायी है. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर चलाये जा रहे इस अभियान में जिले की जीविका दीदियां राष्ट्रभक्ति के साथ रोजगार के नये अवसर भी हासिल कर रही हैं. जिलेभर में 55 हजार राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे पूरा करने के लिए महिलाएं दिन-रात मेहनत कर रही हैं.

30 केंद्रों पर तैयार हो रहे 55 हजार तिरंगे

‘हर घर तिरंगा’ अभियान को सफल बनाने के लिए जिले में जीविका को 55 हजार राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने की जिम्मेदारी दी गयी है. इसके लिए अलग-अलग प्रखंडों में करीब 30 निर्माण केंद्र यानी संकुल स्तरीय संघों (CLF) के माध्यम से तिरंगा निर्माण का काम चल रहा है.

कपड़ा काटने, सिलाई करने से लेकर तिरंगे की फिनिशिंग तक की पूरी प्रक्रिया में करीब 200 जीविका दीदियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. इससे महिलाओं को अभियान से जुड़ने के साथ सीधे आय का अवसर भी मिल रहा है.

बाराहाट में CLF को मिला अलग-अलग लक्ष्य

बाराहाट प्रखंड में भी तिरंगा निर्माण का काम तेजी से चल रहा है. प्रखंड के BPM के अनुसार स्थानीय संकुल स्तरीय संघों को अलग-अलग संख्या में राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है.

बढ़ते कदम CLF को 1,400 तिरंगे तैयार करने की जिम्मेदारी दी गयी है. वहीं नारी उत्थान CLF को 1,300 तिरंगे बनाने का लक्ष्य मिला है. इसके अलावा स्वाभिमान CLF की ओर से भी स्थानीय स्तर पर तिरंगा निर्माण का काम किया जा रहा है.

राष्ट्रध्वज तैयार कर महिलाएं कमा रहीं सम्मानजनक आय

यह पहल केवल ‘हर घर तिरंगा’ अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण की नयी मिसाल भी बन रही है. सिलाई-कढ़ाई के हुनर से जुड़ी महिलाओं को अपने ही क्षेत्र में काम मिल रहा है. इससे उन्हें परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग करने का अवसर मिल रहा है.

जीविका दीदियों का कहना है कि अपने हाथों से राष्ट्रीय ध्वज तैयार करना उनके लिए गर्व की बात है. तिरंगा बनाकर वे देशभक्ति के अभियान में योगदान दे रही हैं और साथ ही इससे मिलने वाली आय उनके परिवार के लिए आर्थिक संबल भी बन रही है.

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहीं ग्रामीण महिलाएं

‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने बांका की ग्रामीण महिलाओं के हुनर को नया मंच दिया है. एक ओर हजारों तिरंगे तैयार कर स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों को गति मिल रही है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है.

55 हजार तिरंगे तैयार करने का यह अभियान पूरा होने के बाद जिले के हजारों घरों तक राष्ट्रीय ध्वज पहुंचेगा. इसके साथ ही करीब 200 जीविका दीदियों के लिए यह अभियान आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है.


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लेखक के बारे में

By अजय कुमार झा

अजय कुमार झा प्रिंट माध्यम में 14 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बाराहाट (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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