महाकुंभ में आदिवासी सनातनी परंपराओं का भव्य संगम

अखिल भारतीय सनातन संथाल समाज द्वारा आयोजित संथाल महाकुंभ के पावन अवसर पर आदिवासी सनातनी समाज द्वारा अपनी प्राचीन धार्मिक परंपराओं और सनातन आस्था का भव्य प्रदर्शन किया गया.

जलाभिषेक से लेकर हरि नाम संकीर्तन तक गूंजा आस्था का स्वर बौंसी. अखिल भारतीय सनातन संथाल समाज द्वारा आयोजित संथाल महाकुंभ के पावन अवसर पर आदिवासी सनातनी समाज द्वारा अपनी प्राचीन धार्मिक परंपराओं और सनातन आस्था का भव्य प्रदर्शन किया गया. इस अवसर पर श्रद्धा और विधि-विधान के साथ श्री-श्री हरि गुरु व मांझी थान में जलाभिषेक किया गया. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया. कार्यक्रम के अंतर्गत प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ का विशेष आयोजन किया गया, इसमें समाज के वरिष्ठ जनों, साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आहुतियां अर्पित की. यज्ञ में विश्व कल्याण, समाज की एकता और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए प्रार्थना की गयी. यज्ञ की पवित्र अग्नि के समक्ष उपस्थित जनसमूह ने परंपरा और आस्था के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त की. इस मौके पर हरि नाम संकीर्तन का भी आयोजन किया गया, जिसमें ढोल, मंजीरा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भजन-कीर्तन हुआ. “हरि नाम” के सामूहिक उच्चारण से वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर संकीर्तन में सहभागी बने. यह दृश्य आदिवासी संस्कृति और सनातन परंपरा के जीवंत स्वरूप को दर्शाता नजर आया. कार्यक्रम में गुरु माता रेखा हेंब्रम और अन्य उपस्थित वक्ताओं और समाज के मार्गदर्शकों ने अपने प्रवचनों में आदिवासी सनातन संस्कृति की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला. गुरु माता ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति, देवस्थानों और सनातन मूल्यों की उपासना करता आया है. चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिकता और भौतिकता के प्रभाव में पारंपरिक संस्कार कमजोर हो रहे हैं, ऐसे में इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें, अपनी भाषा, परंपरा और धार्मिक स्थलों की रक्षा करें. महाकुंभ के दौरान आयोजित यह कार्यक्रम आदिवासी समाज की एकता, धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रतीक बनकर उभरा. कुल मिलाकर, महाकुंभ के इस पावन अवसर पर आदिवासी सनातनियों द्वारा आयोजित यह धार्मिक अनुष्ठान सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है. चार दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन सोमवार को देश के विभिन्न प्रांतों से आये 108 कुंवारी कन्या, 108 कुंवारे लड़के, 108 पतिव्रता नारी और 108 दीक्षित पुरुषों के साथ-साथ अन्य आदिवासी श्रद्धालुओं ने सुबह के 3 बजे से ही मंदार की परिक्रमा आरंभ कर दी थी. अपने सर पर कलश लिए और सजे हुए वाहन पर श्री श्री हरि गुरु बाबा की तस्वीर लेकर पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाते हुए परिक्रमा की गयी. इस मौके पर अपने देश के सनातन धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए शपथ दिलाने का भी काम किया गया. दोपहर बाद प्रवचन का कार्यक्रम किया गया. बताया गया कि आज धर्म सभा का आयोजन किया जायेगा. इसमें वक्ताओं के द्वारा अपने विचार रखे जायेंगे. कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से मालदा के गंगा प्रसाद मुर्मू, बंगाल के ही जलपाईगुड़ी के गणेश हांसदा नेपाल के रेठे मुर्मू, करण मुर्मू, अररिया के शिव हेंब्रम, स्थानीय डा. राज किशोर हांसदा, असम के करण मुर्मू के साथ-साथ गणेश टुडू, राजेश सोरेन, लक्ष्मी मुर्मू सहित अन्य लगे हुए थे.

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By SHUBHASH BAIDYA

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