बिना टिकट यात्रा करते हैं यात्री
स्टेशन पर रेलगाड़ी पहुंचने के बाद खुलता है िटकट काउंटर
बांका : जहां एक ओर मालदा डिवीजन के अधिकारी बांका जंक्शन के निरीक्षण के दौरान यह कहते आये हैं कि बांका से खुलने वाली ट्रेन बांका राजेंद्रनगर इंटरसिटी हो या बांका भागलपुर लोकल ट्रेन किसी भी ट्रेनों में यात्रा करने वाले अधिकांश यात्री टिकट नहीं कटाते वो बिना टिकट के ही यात्रा करते हैं. जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है. बांका से खुलने वाली वर्तमान समय में चार ट्रेनें हैं पहली बांका राजेंद्रनगर इंटरसिटी जो सबसे पहले सुबह 7:35 में बांका जंक्शन से खुलकर भाया भागलपुर राजेंद्र नगर पटना तक जाती है.
दूसरी बांका भागलपुर पैसेंजर ट्रेन जो सुबह 10:30 बजे खुलती है यही पैसेंजर ट्रेन भागलपुर से पुनः 6:30 बजे संध्या में खुलकर बांका आती है और बांका से रात के 9:00 बजे खुलकर भागलपुर जाती है इसी बीच दोपहर 12:25 बजे में नई ट्रेन बांका से खुलकर कटोरिया चांदन होते हुए देवघर तक जाती है. लेकिन अमूमन यह देखा गया है कि किसी भी ट्रेनों के बांका स्टेशन पर पहुंचने के बाद ही टिकट काउंटर खुलते हैं. जिससे टिकट काउंटर पर अत्यधिक भीड़ हो जाने की वजह से अधिकांश यात्री बिना टिकट लिए ही यात्रा करने को मजबूर हो जाते हैं.
जिसका दोष रेलवे के उच्चाधिकारियों के द्वारा बांका की जनता के ऊपर मढ़ दिया जाता है. यह तो वही बात हो गयी कि करे कोई और भरे कोई. हालांकि टिकट काउंटर खुलने की शिकायत सबसे ज्यादा सुबह बांका राजेंद्रनगर इंटरसिटी ट्रेन खुलने के समय की है. वर्तमान समय में बांका जिला मुख्यालय से भागलपुर की ओर जाने वाली सभी मार्ग अत्यधिक वाहनों के जाम रहने की वजह से बांका भागलपुर प्रतिदिन सफर करने वाले अधिकांश यात्री ट्रेन का ही सहारा ले रहे हैं. ऐसी परिस्थिति में यात्री रेलवे के कर्मियों की वजह से बिना टिकट यात्रा करने को मजबूर हैं आखिर इसके लिए कौन जिम्मेवार है.
क्या कहते हैं यात्री
बांका जंक्शन से खुलने वाली ट्रेनों पर अधिकांश समय में यात्रा करने वाले यात्री राजेश कुमार, ऋषि कुमार, प्रीतम कुमार, नीरज कुमार ने बताया कि जब वह सुबह बांका राजेंद्रनगर इंटरसिटी ट्रेन पकड़ने के लिए बांका स्टेशन आते हैं तो टिकट काउंटर बंद मिलता है. जब ट्रेन बांका जंक्शन पर घुस जाती है तब जाकर टिकट काउंटर खुलता है. तब तक तो सैकड़ों की संख्या में यात्री लाइन लगाकर काउंटर पर खड़े रहते हैं. लेकिन जब तक ट्रेन का इंजन घुमाकर आगे लगता है उतने समय में सभी यात्री टिकट नहीं कटा पाते जिससे वह बिना टिकट के ही यात्रा करने को मजबूर हो जाते हैं.
क्या कहते हैं रेल अधिकारी
बांका के लोग जब तक ट्रेन की सीटी नहीं सुनते हैं तब तक वह घरों से नहीं निकलते. स्टेशन पर टिकट काउंटर खुला भी रहता है तो स्टेशन पर टिकट कटाने वाले यात्री नहीं रहते हैं. यही कारन है कि एकाएक टिकट काउंटर पर अत्यधिक भीड़ हो जाती है. जिससे बांका से सफर करने वाले यात्री टिकट नहीं ले पाते.
खाखा
स्टेशन मास्टर, बांका
